By अनन्या मिश्रा | Aug 04, 2025
बहुमुखी प्रतिभा के धनी विशाल भारद्वाज आज यानी की 04 अगस्त को अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। विशाल को संगीत और सिनेमा दोनों में महारत हासिल है। उन्होंने क्रिकेटर बनने का सपना देखा था। वहीं विशाल भारद्वाज ने मेरठ में रहते हुए उन्होंने स्टेट लेवल पर अंडर-19 क्रिकेट भी खेला था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और उन्होंने सिनेमा की दुनिया में अपना नाम कमाया। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर विशाल भारद्वाज के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
बता दें कि विशाल भारद्वाज ने अपने पिता की सलाह पर संगीत सीखा था। क्योंकि उनके पिता ने भी संगीत के क्षेत्र में काम किया था। ऐसे में उन्होंने विशाल को 17 साल की उम्र में एक गाने का संगीत दिया था। जिसको सुनने के बाद विशाल के पिता ने संगीतकार ऊषा खन्ना से बात की। जिसके बाद साल 1985 में फिल्म 'यार कसम' ऊषा खन्ना ने लिया। काम खत्म करने के बाद विशाल वापस दिल्ली चले गए और ग्रेजुएशन पूरा किया।
वहीं विशाल भारद्वाज ने शुरूआती दौर में म्यूजिक रिकॉर्डिंग कंपनी मे भी काम किया। इस दौरान उनकी मुलाकात गुलजार साहब से हुई थी। विशाल ने गुलजार साहब के साथ मिलकर 'चड्डी पहन के फूल खिला है' गीत की रिकॉर्डिंग की थी। इसके बाद साल 1995 में फिल्म अभय से विशाल भारद्वाज ने बतौर संगीतकार डेब्यू किया था। लेकिन उनको असली पहचान फिल्म 'माचिस' से असली पहचान मिली थी। इस फिल्म के लिए विशाल भारद्वाज को साल 1966 में फिल्मफेयर आर. डी. बर्मन पुरस्कार मिला था।
इसके बाद साल 1998 में 'सत्या' और साल 1999 में गुलजार की फिल्म 'हू तू तू' का संगीत दिया। इसके बाद साल 1999 में फिल्म 'गॉडफादर' के लिए विशाल को बेस्ट संगीतकार का नेशनल अवॉर्ड मिला। विशाल ने चाची 420, दस कहांनियां, सोनचिरैया, सात खून माफ, डार्लिंग्स और खुफिया जैसी फिल्मों में संगीत दिया।
वहीं बतौर निर्देशक विशाल भारद्वाज ने सिनेमा को कमाल की फिल्में दी हैं। उनकी फिल्मों में 'ओंकारा', 'हैदर' और 'मकबूल' आदि हैं। इसके अलावा विशाल भारद्वाज ने 'कमीने', 'रंगून', 'पटाखा', 'सात खून माफ' और 'मटरू की बिजली का मंडोला' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है।