By Ananya Mishra | Aug 20, 2026
आज ही के दिन यानी की 20 अगस्त को देश के पूर्व पीएम रहे राजीव गांधी का जन्म हुआ था। वह भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। राजीव गांधी भारत को 21वीं सदी में ले जाने का सपना देखते थे। हालांकि उनको राजनीति में दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन जिस तेजी के साथ राजीव गांधी का राजनीतिक जीवन शुरू हुआ था, उतना ही दर्दनाक और भयावह स्थिति में उसका अंत भी हुआ। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर पूर्व पीएम राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
राजीव की शुरूआती जिंदगी राजनीति से अलग थी। उन्होंने देहरादूर के दून स्कूल से पढ़ाई की और फिर ब्रिटेन चले गए। वहां पर ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में पढ़ाई शुरू की। इसके बाद राजीव गांधी ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। राजीव की दिलचस्पी तकनीक और विज्ञान में थी। वह पायलट बनना चाहते थे।
इसके लिए राजीव गांधी ने दिल्ली फ्लाइंग क्लब की परीक्षा पास की। उन्होंने कमर्शियल पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया। फिर वह इंडियन एयरलाइंस के पायलट बने। वह राजनीति से दूर अपना जीवन जी रहे थे। तभी साल 1980 के विमान दुर्घटना में राजीव के छोटे भाई संजय गांधी की मौत हो गई। ऐसे में राजीव को मजबूरन सियासत में आना पड़ा।
राजीव गांधी ने अमेठी से लोकसभा उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की। धीरे-धीरे राजीव कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय होत गए। वहीं 31 अक्तूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई और कांग्रेस नेतृत्व के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। जिसके बाद राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके बाद उन्होंने आम चुनाव का ऐलान कर दिया। इस चुनाव में कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत मिली और पार्टी ने 508 में से 401 लोकसभा सीटें प्राप्त कीं।
राजीव गांधी के सामने देश को संभालने की चुनौती थी, तो वह आधुनिक भारत की नींव मजबूत करने की महत्वाकांक्षी थे। वह तकनीक के क्षेत्र में भारत को आगे लेकर जाना चाहते थे। वह 21वीं सदी के भारत का सपना देखते थे। राजीव गांधी के कार्यकाल में भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के विस्तार की दिशा आगे बढ़ी। वही बाद के वर्षों में राजीव गांधी को कंप्यूटर और तकनीक क्रांति को बढ़ावा देने वाले नेता के रूप में जाना गया।
जिस तरह से राजीव गांधी के जीवन के रूख अचानक से राजनीति की ओर मुड़ा था। उस तरह एक बेहद भयावह घटना ने उसको हमेशा के लिए रोक दिया। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदूर में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्याकर दी गई थी।