By Ankit Jaiswal | Jul 13, 2026
दुनिया की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों में शामिल फॉक्सवैगन एक बार फिर बड़े बदलाव की तैयारी में है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम ने संकेत दिए हैं कि यदि लागत में पर्याप्त कमी नहीं आई तो दुनिया भर में करीब 50 हजार और नौकरियां खत्म करनी पड़ सकती हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब कंपनी पहले से ही बड़े स्तर पर पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजर रही है।
बता दें कि कंपनी पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और आंशिक सेवानिवृत्ति जैसी योजनाओं के जरिए लगभग 37 हजार कर्मचारियों की संख्या कम कर चुकी है। अब अगले चरण में प्रशासनिक खर्च और अन्य लागत घटाने पर ध्यान दिया जाएगा। ओलिवर ब्लूम के अनुसार फॉक्सवैगन का कुल प्रशासनिक खर्च समान कंपनियों की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है। यदि इसमें सुधार नहीं हुआ तो लगभग 50 हजार अतिरिक्त पद समाप्त करने की स्थिति बन सकती है।
गौरतलब है कि फॉक्सवैगन का पर्यवेक्षण बोर्ड जर्मनी के चार कारखाने बंद करने के प्रस्ताव को पहले ही अस्वीकार कर चुका है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि एमडेन, हनोवर, ज्विकाउ और ऑडी के नेकार्सुल्म संयंत्रों के भविष्य पर अभी भी विचार चल रहा है। कंपनी का कहना है कि कारखाने बंद करना अंतिम विकल्प होना चाहिए और रोजगार बचाने के लिए अन्य संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार फॉक्सवैगन ने महामारी से पहले हर वर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख वाहन बनाए थे, लेकिन अब उत्पादन घटाकर लगभग 90 लाख वाहन सालाना करने की योजना है। चीन में भी स्थानीय कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण उत्पादन में अतिरिक्त कमी की जा रही है।
दूसरी ओर कर्मचारी संगठन आईजी मेटल ने कंपनी की नई योजना का विरोध किया है। संगठन की अध्यक्ष क्रिस्टियाने बेनर ने कहा कि कर्मचारियों ने पहले ही कई समझौते किए हैं, ऐसे में नई नौकरी कटौती स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि कंपनी को रोजगार बचाने के लिए नए औद्योगिक समाधान और बेहतर योजनाओं पर काम करना चाहिए, न कि केवल कर्मचारियों की संख्या घटाने पर ध्यान देना चाहिए।