Prabhasakshi NewsRoom: Durand Line पर धधकी जंग, पाकिस्तानी हमले का तगड़ा जवाब दे रहे तालिबानी, कई पाक सैनिकों के Surrender के वीडियो वायरल

By नीरज कुमार दुबे | Feb 27, 2026

दक्षिण एशिया की पश्चिमी सरहद पर हालात अब आधिकारिक तौर पर जंग की शक्ल ले चुके हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने साफ शब्दों में कहा है कि अब अफगानिस्तान के साथ खुली जंग चल रही है। यह बयान उस वक्त आया जब दोनों देशों के बीच ताजा हवाई हमले, जमीनी झड़पें और चौकियों पर कब्जे के दावे सामने आए। तालिबान शासित अफगानिस्तान ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर बड़े पैमाने पर हमला कर एक दर्जन से अधिक पोस्ट पर कब्जा किया, 19 चौकियां और दो सैन्य ठिकाने तबाह किए और कई सैनिकों को मार गिराया या पकड़ा। वहीं पाकिस्तान ने ऑपरेशन गजब लिल हक के तहत काबुल, कंधार और पकतिया में बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।

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हम आपको बता दें कि तनाव की शुरुआत पिछले रविवार को पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों से हुई। इस्लामाबाद का कहना था कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के ठिकानों को निशाना बनाया। लेकिन काबुल ने आरोप लगाया कि हमले नागरिक इलाकों पर हुए और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया गया। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि सीमा पार कार्रवाई बार बार की गई पाकिस्तानी हरकतों के जवाब में थी। हम आपको बता दें कि डूरंड रेखा 2640 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव मोर्टिमर डूरंड ने अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान खान पर थोपा था। अफगान पक्ष का तर्क है कि यह स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं थी, बल्कि प्रभाव क्षेत्र की रेखा थी। यही ऐतिहासिक घाव आज भी जंग का बारूद बना हुआ है।

दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को और भड़काने वाला दावा था पाकिस्तानी एफ-16 विमान को मार गिराने का। अफगान बलों से जुड़े खातों ने एक वीडियो साझा कर कहा कि अमेरिकी निर्मित एफ-16 लड़ाकू विमान को गिरा दिया गया। पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज किया, लेकिन इस दावे ने मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर असर डाला है। हम आपको बता दें कि एफ-16 पाकिस्तान वायुसेना की सबसे अहम ताकतों में गिना जाता है। अगर तालिबान सीमित संसाधनों के बावजूद उसे चुनौती देने का संदेश दे रहा है, तो यह रणनीतिक संकेत है कि जंग केवल जमीन पर नहीं, आसमान में भी फैल सकती है।

रिपोर्टों के मुताबिक, तोरखम सीमा के पास एक शिविर में गोला गिरने से कई नागरिक घायल हुए। दोनों देशों ने सीमावर्ती गांवों को खाली कराया है। हालात इतने गंभीर हैं कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी रमजान के पवित्र महीने का हवाला देते हुए संयम और बातचीत पर जोर दिया है। इसके बावजूद जमीनी सच्चाई यह है कि दोनों पक्ष एक दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं और गोलाबारी रुक रुक कर जारी है।

हम आपको याद दिला दें कि 1947 के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते अविश्वास और कटुता से भरे रहे हैं। सोवियत हस्तक्षेप से लेकर अमेरिका के अभियान तक, हर दौर में पाकिस्तान ने अफगान प्रतिरोध का समर्थन किया, लेकिन आज वही जमीन उसके लिए चुनौती बन गई है।

साथ ही यह टकराव पाकिस्तान के लिए दो मोर्चों का खतरा पैदा करता है। एक ओर आर्थिक संकट, दूसरी ओर पश्चिमी सीमा पर खुली जंग। तालिबान की रणनीति साफ दिखती है वह सीमित संसाधनों से तेज हमला करता है, चौकियों पर कब्जे का दावा कर मनोबल बढ़ाता है और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर नागरिक नुकसान का मुद्दा उठाकर नैतिक दबाव बनाता है। वैसे अगर अफगान दावों में थोड़ी भी सच्चाई है कि उसने कई पोस्ट पर कब्जा किया और पाकिस्तानी सैनिकों को पकड़ा, तो यह इस्लामाबाद के लिए बड़ा झटका है। पाकिस्तान के भारी हथियार और वायु शक्ति के बावजूद तालिबान गुरिल्ला शैली और भूगोल की समझ के दम पर उसे थका देने वाली जंग में खींच रहा है।

बहरहाल, खुली जंग का ऐलान संकेत है कि हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। इस समय तालिबान रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक मुद्रा में दिख रहा है। पाकिस्तान के लिए यह सिर्फ सीमा संघर्ष नहीं, बल्कि रणनीतिक चुनौती है, जहां हर गलत कदम पूरे क्षेत्र को लंबे अस्थिर दौर में धकेल सकता है।

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