Prabhasakshi NewsRoom: India-Nepal Border पर Khalistani Network का पर्दाफाश, अमेरिकी नागरिक समेत 5 गिरफ्तार

By नीरज कुमार दुबे | Jul 25, 2026

ऐसे समय में जब देश में भारत विरोधी ताकतें छात्र प्रदर्शनों और विभिन्न मुद्दों की आड़ लेकर माहौल को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, तब उत्तर प्रदेश की भारत-नेपाल सीमा से सामने आई घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। हम आपको बता दें कि सुरक्षा एजेंसियों ने न केवल भारत में अवैध घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम किया, बल्कि खालिस्तान समर्थक संगठन 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े दो सक्रिय सदस्यों (जिनमें एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल है) को गिरफ्तार कर यह संकेत दिया है कि भारत विरोधी नेटवर्क अब अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और सीमापार रास्तों का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस के अनुसार 22 जुलाई की शाम करीब 7:50 बजे खुफिया सूचना मिलने के बाद रुपईडीहा स्थित बीआईटी चेक पोस्ट पर संयुक्त जांच अभियान चलाया गया। इसी दौरान एक इनोवा कार को रोका गया, जिसके जरिए नेपाल के नेपालगंज स्थित रांझा हवाई अड्डे से विक्रमजीत सिंह को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ले जाया जा रहा था। जांच के दौरान उसकी गतिविधियां संदिग्ध मिलने पर पूछताछ शुरू हुई। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी और कड़ी कर दी और उसी रात लगभग 9:45 बजे अमेरिकी नागरिक मनबीर सिंह ढिल्लों को भी सीमा स्तंभ संख्या 651/5 के पास भारतीय सीमा में लगभग 40 मीटर भीतर घुसते हुए पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक उसे सुरेश कुमार पाठक मोटरसाइकिल से भारत के भीतर ले जा रहा था।

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पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में दोनों आरोपियों की पहचान सामने आई। पुलिस का कहना है कि विक्रमजीत सिंह पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर का निवासी है और वह पंजाब पुलिस को लंबे समय से वांछित था। उसके खिलाफ अजनाला थाने में हत्या के प्रयास, अपहरण और लूट जैसे गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2023 में पंजाब के अजनाला पुलिस थाने पर हुए हमले के मामले में भी वह वांछित बताया गया है। वहीं अमेरिकी नागरिक मनबीर सिंह ढिल्लों मूल रूप से पंजाब के मोगा जिले का निवासी है और उसके खिलाफ भी पंजाब में आपराधिक साजिश, वैमनस्य फैलाने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज है।


प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि मनबीर सिंह ढिल्लों ने जानबूझकर नेपाल के रास्ते बिना वैध वीजा भारत में प्रवेश करने की कोशिश की ताकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर भारत में दाखिल होना चाहते थे।

जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को कई चौंकाने वाले सबूत भी मिले। विक्रमजीत सिंह के पास से कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल उसकी पहचान छिपाने और देश के भीतर आसानी से आवाजाही के लिए किया जाना था। वहीं मनबीर सिंह ढिल्लों के पास से अमेरिकी पासपोर्ट, अमेरिकी ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक ऑफ अमेरिका और सिटी बैंक के कार्ड, कई अन्य क्रेडिट कार्ड, लगभग 900 अमेरिकी डॉलर, नेपाली मुद्रा तथा एक आईफोन 17 प्रो मैक्स बरामद किया गया। इसके अलावा घुसपैठ में प्रयुक्त होंडा शाइन मोटरसाइकिल और इनोवा कार भी जब्त कर ली गई है।

बहराइच पुलिस ने बताया कि पांचों आरोपियों के खिलाफ रुपईडीहा थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा आव्रजन एवं विदेशी नागरिक नियम, 2025 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब पंजाब पुलिस के साथ समन्वय कर दोनों मुख्य आरोपियों की आपराधिक गतिविधियों, उनके नेटवर्क और संभावित संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सीमा पार से भारत में प्रवेश कराने के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

गौरतलब है कि 'वारिस पंजाब दे' संगठन की स्थापना वर्ष 2021 में अभिनेता से सामाजिक कार्यकर्ता बने दिवंगत दीप सिद्धू ने की थी। समय के साथ यह संगठन पंजाब की धार्मिक-राजनीतिक गतिविधियों में तेजी से सक्रिय हुआ और कई विवादों के केंद्र में रहा। संगठन के कई सदस्यों पर अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनने के आरोप लगते रहे हैं।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भी एक व्यक्ति जिसने स्वयं को अमेरिका के कैलिफोर्निया का निवासी जॉर्डन ब्राउन बताया था, वह बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के नेपाल जाने की कोशिश करते हुए एसएसबी के हत्थे चढ़ा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं भारत-नेपाल खुली सीमा के दुरुपयोग की आशंका को और गंभीर बनाती हैं।

बहरहाल, बहराइच में हुई यह कार्रवाई केवल दो वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि भारत विरोधी और अलगाववादी तत्व अब अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, फर्जी पहचान पत्रों और सीमापार नेटवर्क का सहारा लेकर देश में घुसपैठ की नई रणनीति अपना रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने एक संभावित बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया है, वहीं जांच का अगला चरण इस नेटवर्क की गहराई और उसके संभावित विदेशी संपर्कों का खुलासा कर सकता है।

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