Bulldozer Action: हमें अल्लाह पर भरोसा... अब क्या बोल गए मदनी?

By अभिनय आकाश | Nov 13, 2024

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में चलन में आए बुलडोजर न्याय की तुलना अराजकता की स्थिति से की और देशभर के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि कारण बताओ नोटिस दिए बिना किसी भी संपत्ति को ध्वस्त नहीं किया जाए तथा प्रभावितों को जवाब देने के लिए 15 दिन का वक्त दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा है. जब मध्यप्रदेश के अंदर बुलडोजर चला था, तब ये अचंभा हुआ था। तब हम कोर्ट में गए थे, यह जमीयत उलेमा हिंद की बड़ी उपलब्धि है।

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बता दें कि न्यायालय ने कहा कि प्राधिकारी उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नागरिकों की संपत्ति को ध्वस्त करके उन्हें दंडित नहीं कर सकते। न्यायालय ने ऐसी ज्यादतियों को मनमाना करार दिया और कहा कि इससे सख्ती से निपटे जाने की जरूरत है। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने एक इमारत को बुलडोजर से ध्वस्त करने और महिलाओं, बच्चों तथा वृद्ध व्यक्तियों को रातों-रात बेघर कर देने के दृश्य को भयावह करार दिया। पीठ ने अपने 95 पृष्ठ के फैसले में कहा कि यदि प्राधिकारी न्यायाधीश की तरह काम करते हैं और किसी नागरिक पर इस आधार पर मकान ढहाने का दंड लगाते है कि वह एक आरोपी है तो यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन है। 

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