कमजोर मानसून और आपदा प्रबंधन

By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Apr 16, 2026

आगामी मानसून को लेकर के पहला पूर्वानुमान जारी करने के साथ ही मौसम विभाग ने आने वाले मानसूनी सत्र में सामान्य से कम बरसात के संकेत दे दिए हैं। हांलाकि अभी मानसून के पूर्वानुमान और भी जारी किये जाएंगे पर यह आरंभिक सूचना आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सामान्य से 8 फीसदी तक कम बरसात की संभावना जताई गई है। देश के कई हिस्सों में कम बरसात होने के संकेत है तो कुछ हिस्सों में सामान्य बरसात भी हो सकती है। माना जा रहा है कि अल नीनो इफेक्ट के चलते मानसून कमजोर रहेगा। यह भी सही है कि हमारे मौसम मंत्रालय द्वारा जारी पूर्वानुमान अब काफी हद तक आसपास रहने लगे हैं। यहां तक कि दो से तीन घंटों में बरसात होने या आंधी तूफान या ओलावृष्टि तक के पूर्वानुमान खरे उतरने लगे हैं। ऐसे में मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को गंभीरता से लेते हुए केन्द्र व राज्यों की सरकारों को अभी से पूर्व तैयारियां करने में जुट जाना चाहिए। खासतौर से आपदा प्रबंधन मंत्रालय को अभी से भावी रणनीति तय करनी होगी। देश में मानसून सीजन में 87 सेमी बरसात होती है जिसके अनुमानों के अनुसार 81 सेमी तक रहने की आशंका है। पूर्वानुमानों को माने तो 2018 में 91 प्रतिशत बरसात हुई थी उसके बाद के सालों में मानसून लगभग अच्छा ही रहा है। पिछले आठ सालों में मानसून की स्थिति देखें तो 2023 में मानसून अवश्य कमजोर रहा है अन्यथा देष में मानसूनी वर्षा 100 प्रतिशत के आसापास व इससे अधिक ही रही है। 

इसे भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में बदला मौसम का मिजाज! झमाझम बारिश से लुढ़का पारा, 'संतोषजनक' हुई हवा की सेहत

सौ टके का सवाल यह है कि कमजोर मानसून के हालात से निपटने की कार्ययोजना हमें अभी से बनानी होगी। मौसम विभाग ने अप्रेल में यह चेतावनी दे दी है। मानसून जून में आएगा। ऐसे में अभी मई का महीना हमारे पास है। अभी से सरकार को कमर कसनी होगी। कमजोर मानसून के हालात में हमें कम पानी से अधिक बेहतर हालात बनाने के प्रयास करने होंगे। इसके लिए जहां पानी की एक एक बूंद को सहेजने की रणनीति तैयार करनी होगी वहीं कृषि मंत्रालय को खरीफ के लिए इस तरह की रणनीति बनानी होगी जिसमें कम पानी के उपयोग से बेहतर फसल तैयार होने वाली फसलों और किस्मों के लिए किसानों को प्रेरित हो सके। खेती किसानी भी प्रभावित ना हो और पैदावार भी अच्छी हो इसकी रणनीति बनानी होगी। अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों की खेती ना करने के लिए किसानों को उत्साहित करना होगा। इसी तरह से जलाशयों, बांधों में उपलब्ध पानी का प्रबंधन योजनाबद्ध तरीके से करना होगा। अभी से आमजन को पानी के अपव्यय को रोकने के लिए प्रेरित करना होगा। कहने का अर्थ है कि जब आने वाले हालात की तस्वीर हमारे सामने कमोबेस आ चुकी है तो फिर समय रहते इस तरह की रणनीति बनानी होगी ताकि कमजोर मानसून में भी हमारी जल प्रबंधन क्षमता बेहतर रह सके। आपदा प्रबंधन मंत्रालय को अभी से संबंधित मंत्रालयों खासतौर से कृषि, जल आपूर्ति करने वाले विभागों, बांधों एवं जलाशयों का प्रबंधन करने वाले विभागों, जल संसाधन विभागों से समन्वय बनाकर रणनीति तैयार करनी होगी। इसके साथ ही आमजन को भी पानी के उपयोग को लेकर अधिक सजग और जिम्मेदार नागरिक के रुप में भूमिका निभानी होगी। 

- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

प्रमुख खबरें

Mumbai Indians ने पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच से पहले टीम में किया बदलाव, ये खिलाड़ी हुआ शामिल

India और Austria मिलकर बनाएंगे मजबूत Supply Chain, सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी में होगा बड़ा सहयोग

Middle East में जंग का खतरा? Netanyahu का बड़ा बयान- Iran पर US और हमारा निशाना एक

दो F-35 से भी महंगा, Iran के पास US Navy का 2000 करोड़ का Triton Drone कैसे हुआ क्रैश?