By राजीव शर्मा | Aug 04, 2021
मेरठ। उत्तर प्रदेश में खासकर आगरा, अलीगढ़, एटा, मथुरा, फिरोजाबाद, कासगंज, हाथरस, इटावा, मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बुलंदशहर इन जिलों में सावन में घेवर का बेहद चलन है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में सावन शुरू होने से पहले ही हलवाई घेवर बनाने लगते हैं। उत्तर प्रदेश में इस बार सावन में घेवर की मिठास घटी है। कोरोना के चलते 2020 की तरह इस साल घेवर की मांग कमजोर है। उत्तर प्रदेश में वीकेंड लॉकडाउन के कारण मिठाई विक्रेताओं ने कम घेवर बनाने का फैसला लिया है।
मवाना में अमन स्वीट्स संचालक सुन्दर कहते हैं कि गांव से शहर तक सावन में कुंतलों से घेवर बिकता था। हम हर साल 60 किलो मैदा का घेवर एक महीने में बेच लेते थे। पिछले साल बाजार बंद रहा, इस बार भी पांच दिन दुकान खोलनी है। इसलिए कम माल बनाएंगे। इस बार अभी तो पूरा घेवर बनाना शुरू भी नहीं किया। हर साल सावन के 10 दिन पहले घेवर से दुकान सज जाती थी। घेवर की मांग पिछले वर्षों के मुकाबले मात्र 20-25 प्रतिशत रह गई है। कारीगरों, स्टाफ के खर्चे भी नही निकल रहे। लाला मटरू ने बताया कि मजबूरी में आधे कारीगरों को हटा दिया गया है।