By अनन्या मिश्रा | Apr 01, 2026
हर साल 02 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे मनाया जाता है। यह बच्चों के मस्तिष्क के विकास से संबंधित एक गंभीर समस्या है। जिसका असर जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। लेकिन समय रहते बच्चों में इसके लक्षणों की पहचान और इलाज किया जाए, तो उनमें काफी हद तक सुधार आने की संभावना हो सकती है। एक अनुमान के मुताबिक हर 100 में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार होता है, जिसके लिए दैनिक जीवन के काम करना और नाम सुनते ही जवाब देने में विफलता या लोगों से अलग-थलग रहने की समस्या हो सकती है।
बता दें कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर मस्तिष्क के विकास से संबंधित समस्या है। जो इस बात को प्रभावित करती है कि एक व्यक्ति का दूसरों के साथ व्यवहार कैसा है। इस बीमारी के शिकार लोगों में बातचीत के कौशल और सामाजिक संपर्क में समस्याएं होने लगती हैं। इस विकार की वजह से दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों और व्यवहार को करने तक में परेशानी हो सकती है।
वहीं एएसजी के लक्षण बचपन में दिखने लगते हैं। अक्सर बच्चों में जन्म के पहले साल में ही ऑटिज्म के लक्षणों की पहचान की जा सकती है। 18 से 24 महीने की उम्र में यह विकार बढ़ी हुई समस्याओं के रूप में नजर आने लगती है।
कुछ बच्चों में जन्म के पहले साल में इसके लक्षण साफ तौर पर नजर आने लगते हैं। जैसे बच्चे का आई कॉन्टैक्ट कम होना, बार-बार किसी बात को रटते रहना, नाम सुनने की प्रतिक्रिया में कमी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी महसूस होना आदि।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार वाले कुछ बच्चों को सीखने आदि में परेशानी होती है। वहीं कुछ बच्चों में सामान्य से कम बुद्धि के लक्षण होते हैं। इस विकार वाले अन्य बच्चों में सामान्य से उच्च बुद्धि हो सकती है। वह जल्दी सीखते हैं औऱ रोजमर्रा की जिंदगी में जो भी जानते हैं, उसको संप्रेषित करने और प्रयोग करने में परेशानी हो सकती है।
ऐसे काम करना जो खुद को नुकसान पहुंचा सकती है, जैसे सिर पीटना या काटना।
दिनचर्या के एक खास रूटीन में रमा होना और थोड़े सा बदलाव होने पर परेशान हो जाना।
समन्वय के साथ समस्याएं होना, जैसे पैर की उंगलियों पर चलना या फिर शरीर का बैलेंस बनाने में समस्या होना।
ध्वनि, प्रकाश या स्पर्श के प्रति असामान्य रूप से संवेदनशील होना।
सामाजिक या भाषा कौशल में कठिनाई होना।
जन्म के पहले-दूसरे साल में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के लक्षण दिखने लग जाते हैं। अगर आप अपने बच्चे के विकास के बारे में चिंतित हैं, या फिर आपको संदेह है कि आपके बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से चर्चा करें। वैसे तो ऑटिज्म के लिए कोई खास इलाज नहीं है पर थेरेपी और अन्य उपायों के जरिए इन लक्षणों में सुधार करके जीवन की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है।