चीन को जिसका डर था, अमेरिका ने भारत के साथ वही कर दिया!

By अभिनय आकाश | Feb 21, 2026

दिल्ली में ऐसा फैसला हुआ है, जिसने एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारत ने एक बड़े रणनीतिक कदम के तहत अमेरिकी नेतृत्व वाला गठबंधन पैक्स सिलिका में शामिल होने का ऐलान कर दिया है और माना जा रहा है कि इससे बीजिंग की टेंशन बढ़ गई है। दरअसल बता दें कि नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत ने आधिकारिक तौर पर पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर लिए हैं। इस गठबंधन का मकसद है सेमीकंडक्टर,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस टैक्स सप्लाई चेन को सुरक्षित और चीन पर निर्भरता से मुक्त होना। 

पैक्स सिलिका का उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य एआई और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन तैयार करना है। तकनीकी विकास के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स की निर्बाध आपूर्ति इस रणनीति का अहम हिस्सा है। दिसंबर में बने इस समूह में जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और इस्राइल सहित कई देश शामिल है। अब भारत के औपचारिक रूप से जुड़ने के बाद इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। 

इसे भी पढ़ें: अचानक भारत की सड़कों पर ये क्या हुआ? अमेरिका की धमकियों के बीच रूस-ईरान की सेना ने एकजुट होकर दिखाया दम

क्या इससे और गहरे होंगे रिश्ते

भारत ऐसे समय इस पहल में शामिल हुआ है जब हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में ट्रेड डील और अन्य वैश्विक मुद्दों को लेकर कुछ असहजता देखी गई थी। हालाकि हाल ही में दोनों देशों के बीच एक अतरिम समझौते पर सहमति बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से द्विपक्षीय सहयोग, खासकर इमरजिंग टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में, और गहरा होगा। चीन के दबदबे को संतुलित करने की रणनीति में भारत की भूमिका मजबूत होगी।

क्यों बनाया गया है यह गठबंधन

यह गठबंधन पूरी चिप निर्माण प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। यानी खदानों से निकलने वाले जरूरी खनिजों से लेकर चिप बनाने वाली फैक्टियों तक और उन डेटा सेंटर्स तक, जहां अडवास AI चलाया जाता है- हर स्तर पर सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करना इसका उद्देश्य है।

पैक सिलिका से इससे जुड़ने से भारत को क्या-क्या फायदा होगा

हाई क्वालिटी चिप मैन्युफैक्चरिंग होगी। सप्लाई चेन विविधकरण होगा। टेक्निकल निवेश बढ़ेगा। इसके साथ ही 6G डाटा सेंटर और एडवांस होंगे। मैन्युफैक्चरिंग में संयुक्त प्रोडक्शन बढ़ेगा। भारत में पहले से ही 10 सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित या प्रक्रिया में है। उम्मीद है कि जल्द भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट कमर्शियल प्रोडक्शन जल्दी ही शुरू करेगा। भारत में दो नैनोमीटर चिप डिजाइनिंग पर भी काम हो रहा है जो दुनिया की सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी में गिनी जाती है। इंडिया यूएस संबंधों पर भी पैक्स सिलिका का असर पड़ेगा। बता दें कि यह कदम प्रस्तावित इंडिया यूएस ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

एआई और सेमीकंडक्टर में स्टार्टअप्स शुरू होंगे 

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने इसे 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने वाला रणनीतिक गठबंधन बताया। उन्होंने कहा कि भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा और अमेरिका की टेक्नोलॉजी क्षमता मिलकर विश्वसनीय एआई इकोसिस्टम तैयार कर सकती है। युवाओं और अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा।  स्किल डेवलपमेंट बढ़ेगा। इसके साथ ही टैक सेंटर में नई नौकरियां आएंगी। विदेश निवेश बढ़ेगा। एआई और सेमीकंडक्टर में स्टार्टअप्स शुरू होंगे और इकोसिस्टम इससे मजबूत होगा। 47 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए यह एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। क्रिटिकल मिनरल्स के खनन से लेकर उन्हें चिप्स में परिवर्तित करने और फिर डेटा सेंटर्स तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया इसमें शामिल है। भारत के लिए यह गर्व की बात है कि अब हम पैक्स सिलिका का हिस्सा है। इससे हम इस महत्वपूर्ण सप्लाई चेन में एक प्रमुख भूमिका निभाएंगे। यह भारत के टेक्नोलॉजी से जुड़े कार्यक्रममें के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

प्रमुख खबरें

West Asia Tension और US Fed के फैसले तय करेंगे Share Market की चाल, Crude Oil की कीमतों पर टिकी सबकी नजर

Samsung और SK Hynix का US Tech कंपनियों के साथ $950 Billion का मेगा एग्रीमेंट, AI Revolution को मिलेगी नई गति

मजबूत आवास मांग से महिंद्रा लाइफस्पेस की बिक्री बुकिंग दोगुनी से अधिक होकर 925 करोड़ रुपये पहुंची

राष्ट्रमंडल टेबल टेनिस चैंपियनशिप: खिताब की मजबूत दावेदार के रूप में उतरेगी भारतीय पुरुष टीम