2002 Gujarat riots: तीस्ता का प्रोपेगेंडा, कांग्रेस का एजेंडा, अहमद पटेल ने दिए थे 30 लाख, HC से गुजरात सरकार ने क्या कहा?

By अभिनय आकाश | Jun 15, 2023

साल 2002 के गुजरात दंगों में निर्दोषों को फंसाने की साजिश रचने की आरोपी तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका का गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में विरोध किया है। गुजरात सरकार ने गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया कि तीस्ता सीतलवाड़ ने 2002 के गुजरात दंगों के बाद मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए राजनेताओं के हाथों की एक कठपुतली के रूप में काम किया। इसमें कहा गया है कि 2002 के दंगों के बाद गुजरात में तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार को गिराने के लिए उन्हें पूर्व कांग्रेस नेता अहमद पटेल द्वारा 30 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

यह बयान राज्य सरकार की तरफ से सीतलवाड़ की जमानत अर्जी का विरोध करने के दौरान दिया गया है। सीतलवाड़ पर  2002 के गुजरात दंगों के मामले में सबूतों को गढ़ने का आरोप है। लोक अभियोजक मितेश अमीन द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए राज्य के अभियोजन पक्ष ने 2002 के दंगों से संबंधित मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की उसकी क्षमता पर प्रकाश डाला है। मृतक कांग्रेस नेता अहमद पटेल का जिक्र करते हुए, मितेश अमीन ने भी न्यायमूर्ति निरज़ार देसाई की अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि तीस्ता सीतलवाड़ कुछ राजनीतिक दल के कुछ राजनेताओं के हाथों में एक उपकरण थीं। सरकारी वकील ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ ने पुलिस अधिकारियों आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट के साथ मिलकर गुजरात सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची थी।

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एसआईटी के दावों का भी दिया गया हवाला

कोर्ट में तीस्ता की बेल याचिका का विरोध करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के दावे का हवाला भी दिया गया। जिसमें तीस्ता के खिलाफ सबूत मिलने की बात थी। बता दें कि जुलाई 2022 में एसआईटी के हलफनामे के मुताबिक अहमद पटेल को गुजरात दंगों के  बाद मोदी को बदनाम करने की साजिश की जानकारी थी। अहमद पटेल के कहने पर तीस्ता सीतलवाड़ को 30 लाख रुपये दिए गए। एसआईटी के हलफनामे के मुताबिक तीस्ता सीतलवाड़ को दो बार फंड दिए गए। ये सारी जानकारी एसआईटी की तरफ से कोर्ट में दी गई थी। 

फर्जी सबूत गढ़ने के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

गुजरात दंगा मामले में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए फर्जी सबूत गढ़ने के आरोप में तीस्ता सीतलवाड़ समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद गुजरात पुलिस के विशेष जांच दल की ओर से कोर्ट में पेश किए गए एक हलफनामे में भी कहा गया था कि तीस्ता का उद्देश्य बड़े षड़यंत्र को अंजाम देते हुए गुजरात सरकार को गिराना या अस्थिर करना था। 

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