दुनिया की आधी आबादी और ग्लोबल जीडीपी का 40 % हिस्सा रखने वाले देशों को दी गई धमकी, कहीं NATO के अस्तित्व पर ही न भारी पड़ जाए

By अभिनय आकाश | Jul 16, 2025

डोनाल्ड ट्रंप शांति दूत बनकर पूरी दुनिया में घूम रहे हैं। जहां भी दो देश आपस में भिड़े वहां शांति का मसीहा बन ट्रंप बिन बुलाए बाराती की तरह बीच में आ जा रहे हैं। लेकिन रूस और यूक्रेन में ट्रंप अभी तक शांति बहाल नहीं करवा पा रहे हैं और दोनों देशों में युद्ध लगातार बढ़ता जा रहा है। पुतिन ट्रंप की बात मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अब ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पुतिन को टैरिफ बम की धमकी दी गई। वो भी 100 प्रतिशत का टैरिफ बम रूस पर फोड़ने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि ट्रंप का टैरिफ बम रूस और यूक्रेन के बीच का युद्ध रुकवा पाएगा और क्या इस टैरिफ बम का रूस के दोस्त देशों पर भी बुरा असर होगा। नाटो के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट ने ब्राज़ील, चीन और भारत को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वे रूस के साथ व्यापार जारी रखते हैं तो उन्हें गंभीर आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। 

इस धमकी का भारत पर क्या असर पड़ेगा

ये बात तो किसी से छुपी नहीं है कि रूस भारत का सबसे पुराना और जांचा-परखा दोस्त है। डिफेंस सेक्टर में दोनों देशों की साझेदारी वर्षों पुरानी है जिसे अमेरिका नए नए ऑफर देकर भी नहीं तुड़वा पाया है। वहीं तेल खरीद में भी भारत रूस का की पार्टनर है। मॉस्को से सस्ता कच्चा तेल खरीद भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को लगातार मजबूत किया है। ऐसे में अगर अमेरिका की तरफ से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाते हैं तो भारत के दवाईयां, कपड़े जैसे निर्यात पर सीधा असर होगा। लेकिन भारत ने साफ कहा है कि वो अपनी नीतियों को स्वतंत्र रखेगा, किसी के दबाव में नहीं झुकेगा। एक बात और गौर करने वाली है कि भारत ब्रिक्स में एक्टिव तो है, लेकिन उसके अमेरिका और क्वाड संग भी अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में नाटो की धमकी भारत के लिए एक चुनौती है, लेकिन भारत ने पहले भी ऐसी धमकियों का जवाब अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से दिया है।

ब्राज़ील, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य देश

भारत में अकेला नहीं है। द्वितीयक टैरिफ़ का ख़तरा कई महाद्वीपों के एक दर्जन से ज़्यादा देशों पर मंडरा रहा है। पश्चिम एशिया में संयुक्त अरब अमीरात रूसी ऊर्जा लेनदेन के लिए एक वित्तीय माध्यम के रूप में कार्य करता है, भले ही वह रूसी तेल का प्राथमिक उपभोक्ता न हो। दुबई, विशेष रूप से,रूसी पूँजी और कुलीन वर्ग की संपत्ति के लिए एक वित्तीय अभयारण्य बन गया है। नाटो का सदस्य तुर्की, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस सहित रूसी जीवाश्म ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है। ब्राज़ील, एक प्रमुख कृषि अर्थव्यवस्था, रूसी उर्वरकों के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। वियतनाम और थाईलैंड, जिन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष में तटस्थ रुख बनाए रखने की कोशिश की है, मास्को के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंध भी बनाए हुए हैं।

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ब्रिक्स बनाम नाटो

नाटो में यूरोप के 30 देश और उत्तरी अमेरिका के कनाडा और यूएस है। नाटो का बजट 1.3 ट्रलियन डॉलर है। नाटो सदस्यों के पास लगभग 1,346,400 कर्मियों की सेना है। उनमें से मोटे तौर पर 165000 सैनिक तैनात हैं, जबकि 799,500 रिजर्व सैनिक हैं। वहीं ब्रिक्स कई देशों का एक ग्रुप है जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका के अलावा इजिप्ट, इथोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई भी शामिल हैं। कुल मिलाकर 11 देश हैं और ये सारे ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी की मुखालफत करते आए हैं और कहा कि ये वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के नियमों के खिलाफ है। आपको बता दें कि ब्रिक्स देश ग्लोबल जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत है और दुनिया की लगभग आधी आबादी इन्हीं के पास है तो ऐसे में आप समझ ही सकते हैं कि इनका रूतबा कितना ज्यादा है।

पुतिन झुक जाएंगे

यूरोपियन यूनियन, अमेरिका ने मिलकर रूस के ऊपर 21 हजार प्रतिबंध लगाए हुए हैं। लेकिन इसका कोई खास फर्क नहीं पड़ता नजर आता है। जो व्यापार अमेरिका और रूस के बीच 35 से 40 बिलियन डॉलर का हुआ करता था वो आज सिर्फ 5 बिलियन डॉलर का होता है। ऐसे में अगर आप 100 फीसदी टैरिफ लगा भी देते हैं तो क्या फर्क पड़ जाएगा। फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ। 2023-24 में रूस की अर्थव्यवस्था 2019-2020 से भी बेहतर रही। 2023 में रूस की अर्थव्यवस्था यूरोप के कई देशों से बेहतर रही। 2024 में भी रूस की अर्थव्यवस्ता यूरोप के कई देशों से बेहतर रही। एक तरह से ये इतिहास रचने का काम रूस की तरफ से किया गया है। जब देश युद्ध में होता है तो जाहिर सी बात है कि पैसा और संसाधन के अलावा लोगो का नुकसान होता है। जीडीपी पर असर पड़ता है, लेकिन रूस के मामले में कहानी थोड़ी अलग है। रूस का ग्रोथ रेट बढ़ा है। 

युद्ध रुकवाना या ट्रंप का कोई और प्लान है

इसमें कोई शक नहीं है कि ट्रंप एक व्यापारी आदमी हैं, जितने ज्यादा देशों से पैसा वो कमा पाएं वो उनकी नीति रहती है। ईरान और इजरायल के बीच की जंग को ही देखे तो मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान को 30 बिलियन डॉलर का लालच दिया गया, जिससे वो अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर दे। वहीं रूस और अमेरिका के बीच मामला थोड़ा अलग है। ट्रंप और पुतिन के बीच तीन बार फोन पर बात हुई है। एक बार तो पुतिन ने एक घंटे से ज्यादा वक्त तक ट्रंप को फोन पर इंतजार करवाया। इसमें सबसे दिलचस्प ये रहा कि तीनों बार जब भी ट्रंप से उनकी बात हुई ठीक उसी के बाद यूक्रेन पर रूस ने सबसे बड़ा हमला किया। ऐसे में अगर ट्रंप ये सोच रहे हैं कि टैरिफ लगाकर पुतिन को झुका लेंगे, डरा लेंगे या युद्ध रुकवा लेंगे तो ऐसा होना तो फिलहाल असंभव ही दिखता है। 

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