Prajatantra: सद्भावना रैली के जरिए Mamata Banerjee ने खेला कौन सा दांव, अब क्या करेगी BJP?

By अंकित सिंह | Jan 23, 2024

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव से पहले धर्म का राजनीतिकरण करने के प्रयास के लिए भाजपा पर निशाना साधा और भगवान राम के बारे में विमर्श से देवी सीता को हटा देने के लिए उसे ‘‘महिला विरोधी’’ करार दिया। ममता बनर्जी की सद्भावना रैली को लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। एक ओर जहां भाजपा हिंदुत्व की राजनीति पर जोर दे रही है तो वहीं ममता बनर्जी अपनी इस रैली के जरिए पश्चिम बंगाल में एक खास समुदाय के वोट बैंक को साधने की कोशिश की। ममता ने हिंदुओं को भी अपने साथ रखने की कोशिश की है। ममता का उद्देश्य यह बताना है कि वह सभी धर्म को एक नजर से देखती हैं और किसी के बीच भेदभाव नहीं करती। लेकिन कहीं ना कहीं ममता की इस रैली को सियासी नफा नुकसान से जोड़कर देखा जा रहा है।

किसका मिला साथ

टीएमसी प्रमुख ने विभिन्न धर्मों के नेताओं और अपनी पार्टी के नेताओं के साथ कोलकाता के हाजरा मोड़ से यात्रा शुरू की और यह पार्क सर्कस क्रॉसिंग पर समाप्त हुई। यात्रा के दौरान, उन्होंने रास्ते में एक मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च का दौरा किया। सीएम के साथ चलने वालों में नाखोदा मस्जिद के इमाम मोहम्मद शफीक कासमी, श्रद्धेय परितोष कैनिंग और बौद्ध धार्मिक नेता अरुणज्योति भिक्खु शामिल थे। सफेद और नीली बॉर्डर वाली सूती साड़ी पहने और गले में शॉल लपेटे बनर्जी को सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों का हाथ जोड़करअभिवादन करते देखा गया। अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि कोई कहता है हिंदू खतरे में है. कोई कहता है मुसलमान ख़तरे में है। मैं कहता हूं कि धरम का चश्मा हटा के देखो, पूरा हिंदुस्तान खतरे में है। उनका निशाना सीधे तौर पर भाजपा पर था।

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सद्भावना रैली क्यों जरूरी

भाजपा देश में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को लेकर अपनी राजनीति को उधार देने की कोशिश में लगी हुई है। पश्चिम बंगाल में भी उसने पिछले चुनाव में हिंदुत्व को जबरदस्त तरीके से उठाया है। इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा पश्चिम बंगाल में अपने 2019 के प्रदर्शन में और सुधार करने की उम्मीद में है। पश्चिम बंगाल में लोकसभा के 42 सीटें हैं जिसमें से भाजपा ने पिछले चुनाव में 18 पर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी ने राज्य में 35 प्लस जीतने का लक्ष्य रखा है। लेकिन ममता बनर्जी 40 सीटों पर जीत हासिल करने की तैयारी में है। ऐसे में इस चुनाव में भाजपा और ममता के बीच जोरदार टक्कर होने की संभावना है। ममता बनर्जी सद्भावना रैली के जरिए मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में रखने की तैयारी में है। बंगाल में करीब 30 फ़ीसदी मुस्लिम मतदाता है जो विधानसभा की लगभग 100 सीटों पर निर्णायक भूमिका में है। राज्य में 46 विधानसभा की सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 50% से ज्यादा है ।यही कारण है कि ममता बनर्जी की ओर से राज्य में मुस्लिम मतदाताओं को लगातार साधने की कोशिश की जाती है। वहीं भाजपा ममता पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाती रहती हैं।

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