क्यों 'स्वाहा' बोले बिना नहीं मिलता है यज्ञ का फल

By विंध्यवासिनी सिंह | Feb 02, 2021

भारत शुरू से ही ऋषि-मुनियों का देश रहा है। यहां होने वाले धार्मिक क्रियाकलाप का आयोजन ऋषि परंपरा की ही देन है।

अगर आपको लगता है कि पंडित जी यूं ही 'स्वाहा' बोलने को कह रहे हैं, तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि किसी भी यज्ञ में अगर 'स्वाहा' बोले बगैर यज्ञ सामग्री डाली जाती है तो वह यज्ञ सामग्री देवताओं को प्राप्त नहीं होती है। और हमारा यज्ञ अधूरा रह जाता है। 

आइये जानते हैं इसके पीछे का रहस्य...

हवन के समय 'स्वाहा' बोले के पीछे की प्राचीन कथा

हमारे धार्मिक ग्रंथों में 'स्वाहा' को लेकर तमाम तरह की किवदंती प्रचलित हैं।

ऐसी ही एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि 'स्वाहा' राजा दक्ष की पुत्री थीं, जिनका विवाह अग्निदेव के साथ संपन्न कराया गया था। इसीलिए अग्नि में जब भी कोई चीज समर्पित करते हैं, तो बिना स्वाहा का नाम लिए जब वह चीज समर्पित की जाती है, तो अग्निदेव उसे स्वीकार नहीं करते हैं।

ऐसे ही एक और कथा प्रचलित है, जिसमें कहा जाता है कि प्रकृति की एक कला के रूप में स्वाहा का जन्म हुआ था, और स्वाहा को भगवान कृष्ण से यह आशीर्वाद प्राप्त था कि देवताओं को ग्रहण करने वाली कोई भी सामग्री बिना स्वाहा को समर्पित किए देवताओं तक नहीं पहुंच पाएगी। यही वजह है कि जब भी हम अग्नि में कोई खाद्य वस्तु या पूजन की सामग्री समर्पित करते हैं, तो 'स्वाहा' का उच्चारण करना अनिवार्य होता है।

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ऐसी ही एक अन्य कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें यह बताया गया है कि एक बार देवताओं के पास अकाल पड़ गया और उनके पास खाने-पीने की चीजों की कमी पड़ने लग गई। इस विकट परिस्थिति से बचने के लिए भगवान ब्रह्मा जी ने यह उपाय निकाला कि धरती पर ब्राह्मणों द्वारा खाद्य-सामग्री देवताओं तक पहुंचाई जाए। 

इसके लिए अग्निदेव का चुनाव किया गया, क्योंकि यह ऐसी चीज है जिसमें जाने के बाद कोई भी चीज पवित्र हो जाती है। हालांकि अग्निदेव की क्षमता उस समय भस्म करने की नहीं हुआ करती थी, इसीलिए स्वाहा की उत्पत्ति हुई और स्वाहा को आदेश दिया गया कि वह अग्निदेव के साथ रहें। इसके बाद जब भी कोई चीज अग्निदेव को समर्पित किया जाए तो स्वाहा उसे भस्म कर देवताओं तक उस चीज को पहुंचा सके। 

यही कारण है कि जब भी अग्नि में कोई चीज हवन करते हैं, तो 'स्वाहा' बोलकर इस विधि को संपूर्ण की जाती है, ताकि खाद्य पदार्थ या हवन की सामग्री देवताओं को सकुशल पहुंच सके।

तो ये हैं वह कारण, जिसके चलते हवन में डाली सामग्री के बाद 'स्वाहा' बोलना धार्मिक रूप से अनिवार्य होता है।

- विंध्यवासिनी सिंह

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