ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु संग PM मोदी की मुलाकात, गोवा-केरल के लिहाज से क्यों मानी जा रही महत्वपूर्ण?

By अभिनय आकाश | Oct 30, 2021

एक तरफ ऐसी ताकतें दुनिया मेंं मौजूद हैं जो फूट डालने के काम में लगी हैं। लेकिन कोरोना व अन्य वैश्विक मुद्दे  जिनको एड्रेस करने में भारत भी एक बड़ा हिस्सेदार है। ऐसे में दुनिया के दो अलग-अलग कल्चर को जोड़ने की पहल आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से की गई। दो अलग-अलग मुख्तलिफ मुल्क व कल्चर जब साथ आते हैं जो दुनिया के लगभग सभी मुद्दों पर बात होगी। पीएम मोदी इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के निमंत्रण पर 29 से 31 अक्तूबर तक रोम, इटली और वेटिकन सिटी के दौरे पर हैं। पीएम की मुलाकात वेटिकन में पोप फ्रांसिस से हुई।

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कैथलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु 

बता दें कि पीएम मोदी ईसाइयों के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस से मिलने वेटिकन सिटी पहुंचे थे। उनके साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल भी मौजूद रहे। पीएम मोदी  पोप फ्रांसिस से मुलाकात के बाद वेटिकन सिटी से रवाना हो गए हैं। यह मुलाकात 30 मिनट की बताई गई है। ईसा मसीह के बाद कैथलिक धर्म के सबसे बड़े पद को पोप कहा जाता है। पोप कैथलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु होते हैं।

केरल और गोवा के लिहाज से अहम

गोवा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले पीएम मोदी की पोप फ्रांसिस से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है। जब आप गोवा के भीड़भाड़ वाले समुद्री तटों से दूर दक्षिणी गोवा में प्रवेश करते हैं, तो वहां के ऊंचे-ऊंचे गिरजाघर आपका स्वागत करते हैं। यहां की 40 विधानसभाओं में से 10 पर कैथोलिक समुदाय का बोलबाला है। राज्य की कुल आबादी 28 फीसदी कैथोलिक है, जो दक्षिणी गोवा में रहता है। इसके अलावा  रोमन कैथोलिक चर्च का केरल में भी अच्छा खासा प्रभाव है। केरल में 18.5 प्रतिशत ईसाइ हैं। केरल में बीजेपी एक मजबूत ताकत के रूप में उभरने के लिए ईसाइयों का समर्थन पाना चाहती है। इसी क्रम में जनवरी में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईसाई समुदाय के तीन मुख्य पादरियों से बीतचीत की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने ईसाई समुदाय से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा भी की थी। 

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