By अभिनय आकाश | Mar 30, 2026
ईरान में जब गुस्सा सड़कों पर था तब वाशिंगटन मुस्कुरा रहा था। लेकिन आज वही गुस्सा न्यूयॉर्क, टेक्सास और कैलिफोर्निया की सड़कों पर दिखाई दे रहा है। क्या अली खामन के खिलाफ जो हुआ वही अब अमेरिका के साथ हो रहा है? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि लगभग 1 करोड़ अमेरिकी सड़कों पर उतरे हुए हैं। जो डोनाल्ड ट्रंप पर राजा की तरह बर्ताव करने का आरोप लगा रहे हैं और इसकी एक नहीं कई वजह हैं। 80 लाख से करोड़ अमेरिकनंस अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर निकले। दुनिया के 135 देशों की आबादी उस संख्या से कम है जिसने लोग ट्रंप के विरोध में सड़कों पर दिखाई। अमेरिका की चौड़ी, चमचमाती और हमेशा गाड़ियों से भरी रहने वाली सड़कें ट्रंप विरोधी पोस्टर लिए अमेरिकी लोगों से भरी दिखाई। अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3300 से ज्यादा जगहों पर लोग सिर्फ एक बात कर रहे हैं। अमेरिका के प्रदर्शनकारियों का आरोप है ट्रंप अमेरिका को तानाशाह की तरह चला रहे हैं। लेकिन अमेरिका में सत्ता जनता की राजा की है। अमेरिका के लगभग हर बड़े शहर में प्रदर्शन जिसमें न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस भी शामिल है। जो शहर जितना बड़ा है वहां प्रदर्शन उतना ही ज्यादा विशाल दिखाई।
नो किंग एक ग्रासरूट आंदोलन है, जो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके शासन के तरीके का विरोध करता है। प्रदर्शनकारी उन्हें 'तानाशाही शैली' का नेता बताते है और लोकतात्रिक मूल्यों पर खतरा मानते है। आयोजकों के अनुसार, 3,300 से ज्यादा जगहो पर प्रदर्शन हुए। 80 लाख लोग इसमें शामिल हुए। हालांकि प्रशासन ने आधिकारिक आकड़ा जारी नहीं किया है। यह पिछले एक साल में तीसरा बड़ा विरोध प्रदर्शन है।
मुख्य नाराजगी ट्रंप की कड़ी इमिग्रेशन नीतियों, कार्यकारी आदेशो के जरिए फैसले लेने की शैली और ईरान के साथ बढ़ते युद्ध को लेकर है। कई लोगों का मानना है कि इससे देश का लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर हो रहा है। न्यू यॉर्क सिटी, वॉशिंगटन, मिनियापोलिस जैसे बड़े शहरों में भारी भीड़ देखने को मिली। यहां हजारों लोगों ने रैलिया और मार्च निकाले।