Health Tips: आपका Lipid Profile क्या कहता है? जानें LDL, HDL और Triglycerides का दिल से कनेक्शन

By अनन्या मिश्रा | May 23, 2026

ट्राईग्लिसराइड्स, LDL और HDL यह तीनों ही दिल की बीमारियों से जुड़े है। आम भाषा में LDL को खराब कोलेस्ट्रॉल, HDL को अच्छा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को नसों में जमा फैट कहा जाता है। इन तीनों के ऊपर-नीचे होने से दिल की सेहत पर असर होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन तीनों के आपस के संबंध और दिल की बीमारी से इनके कनेक्शन के बारे में बताने जा रहे हैं।

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जानिए क्या है LDL

LDL का मतलब है लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन होता है। जिसको आम भाषा में खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसके कणों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कोशिकाओं तक पहुंचाता है। जब शरीर में LDL की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो हाई LDL आर्टरी से चिपकने लगता है और इस फैट को प्लाक कहा जाता है। लगातार आर्टरी पर जमने की वजह से आर्टरीज सख्त और संकरी हो जाती है। जिससे ब्लड फ्लो में रुकावट आती है और दिमाग और दिल तक ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं पहुंच पाता है। अगर यह प्लाक फट जाता है, तो इस कारण स्ट्रोक या हार्ट अटैक हो सकता है। हाई LDL हार्ट संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकता है।

क्या है ट्राइग्लिसराइड्स

यह शरीर में पाया जाने वाला फैट होता है, जोकि अच्छी सेहत के लिए बॉडी में कुछ मात्रा में होना जरूरी होता है। ट्राइग्लिसराइड्स ब्लड में मौजूद एक तरह का लिपिड है, जोकि ब्लड सर्कुलेट करता है। जब लोग ऐसी कैलोरी लेते हैं, जिसकी शरीर को जरूरत नहीं होती है तो शरीर इसको ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है। इस्तेमाल न होने वाली कैलोरी फैट सेल्स में जमा हो जाते हैं। जब शरीर में कैलोरी की जरूरत हो, तो यह ट्राइग्लिसराइड्स ब्लड में रिलीज होते हैं। शरीर में जब ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं, तो लिपिड डिसऑर्डर होता है। अगर बॉडी में HDL कम हो जाए और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाए, तो यह शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ट्राइग्लिसराइड्स अधिक होने पर हार्ट की बीमारियों और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।

लिपिड प्रोफाइल में LDL, HDL, Triglycerides कैसे चेक करें

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए शरीर में कोलेस्ट्रॉल और फैट की जांच की जा सकती है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल, HDL, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स चेक किया जाता है। दिल संबंधी बीमारी या स्ट्रोक के खतरे को चेक करने के लिए इस टेस्ट को करने की सलाह दी जाती है। यह टेस्ट कराने से पहले व्यक्ति को कम से कम 9 से 12 घंटे की फास्टिंग करनी होगी। हालांकि इस दौरान पानी पिया जा सकता है। लिपिड प्रोफाइल कराने से 24 घंटे पहले शराब नहीं पीना चाहिए।

डॉक्टर से कम मिलें

अगर लगातार बीपी की समस्या बनी रहे, ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहे, ज्यादा पसीना आए, सीने में दर्द, आराम की पोजिशन में सांस फूलना और बहुत ज्यादा थकान आदि के लक्षण महसूस हों, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

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