By अभिनय आकाश | Jun 08, 2026
वैश्विक हालात इस वक्त किसी चेसबोर्ड की तरह हैं, जहां भारत एक बार फिर से चेकमेट की तरफ है। यहां हर पल नए बदलाव हो रहे हैं, लेकिन भारत हर मोड़ पर खुद को बलवान साबित कर रहा है। एक तरफ ट्रंप भारत को टैरिफ वाली धमकी देते हैं। दूसरी तरफ व्लादिमीर पुतिन हैं जो भारत को सबसे एडवांस फाइटर जेट साथ बनाने का ऑफर दे रहे हैं। भारत अपनी स्वदेशी तकनीक और रक्षा बजट में भारी बदलाव कर रहा है। जिससे चीन और पाकिस्तान का गला अभी से सूख रहा है। दुनियाभर को आंख दिखाने वाले डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ डील करने की बातों को दोहरा रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का बारूदी पावर अब शिफ्ट हो रहा है। भारत को दी गई धमकी अब ट्रंप को महंगी पड़ने वाली है। क्या ट्रंप को ट्रेलर दिखने लगा है। क्या रूस भारत की दोस्ती अमेरिका को करारा जवाब देने की तैयारी कर रही है। स्ट्रैटजिक ऑटोनॉमी का ये अध्याय दुनिया को बता रहा है कि भारत किसी के दवाब में नहीं आता है। आज का एमआरआई इसी विषय पर करेंगे कि भारत कैसे मजबूत हो रहा है और अमेरिका भारत की तरफ डील को लेकर आंखें उठाकर देख रहा है।
भारत और रूस के बीच पहली सुखोई डील 30 नवंबर 1996 को हुई थी। इस डील की कुल कीमत 1.462 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी उस समय के हिसाब से लगभग 7155 करोड़ थी। शुरू में 50 विमानों की डील हुई थी जिनमें 40 एसयू 30 के और 10 एसयू 30 एमकेआई शामिल था। यह डील रूस के साथ भारत की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील थी। शुरू में एसयू 30 के आया लेकिन बाद में भारत ने एसयू30 एमकेआई इंडिया स्पेसिफिक वर्जन की मांग कर दी। 1998 से 2000 के बीच सुखोई की पहली खेप भारत पहुंची। इस डील के बाद भारत ने कई फॉलो ऑन ऑर्डर दिए जिससे कुल संख्या 270 से ज्यादा हो गई। इस डील ने भारत रूस रक्षा संबंधों को नया आयाम दिया। पहले भारत मुख्य रूप से मिग 21 मिग 29 पर निर्भर था। एसयू 30 एमKI ने इंडियन एयरफोर्स को हैवी मल्टी रोल फाइटर कैपेबिलिटी दी। भारत के पास इस वक्त सुखोई के दो वर्जन हैं। पहला एसयू 30 एमKI यह भारत के लिए कस्टमाइज वर्जन है और दुनिया के सबसे कैपेबल ट्विन सीटर फाइटर्स में से एक है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड नासिक में इसका लाइसेंस प्रोडक्शन कर रहा है। दूसरा है सुपर Sukoi सुपर 30 यानी SQ30 का अपग्रेडेड वर्जन। इसके अंदर भारतीय विरुपक्षा रडार लगा है। साथ ही बेहतर रडार वार्निंग और डिजिटल सिस्टम लगा है। अपग्रेड करने का मुख्य लक्ष्य इसे 4.5 प्लस जनरेशन स्तर का बनाना और इसका जीवन 20 से 25 साल बढ़ाना था।
भारत इस वक्त दुनिया भर में हथियारों के सबसे बड़े खरीदार में से एक है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान भारत को F35 की पेशकश की थी। अब पुतिन के नए प्रस्ताव के बाद माना जा रहा है कि रूस इन पुरानी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहा है। पुतिन के इस ऑफर के ठीक बाद ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए बड़ी बात कही और डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि वो भारत से डील करने के लिए बेताब है। ट्रंप एक तरफ तो भारत के खिलाफ दबाव की रणनीति अपनाते हैं तो दूसरी तरफ पीएम मोदी की तारीफ कर मामले को बैलेंस करने की भी पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन पुतिन भी एक मझे हुए राजनेता हैं और वो किसी भी कीमत पर अपने पुराने साथी भारत के साथ रिश्ते को कमजोर नहीं होने देना चाहते हैं। पुतिन ने अपने संबोधन के दौरान सुखोई डील की बात की। साथ ही भारत को लेकर कई और अहम बातें कही। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा भारत एक मजबूत और स्वतंत्र देश है जो अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से फैसला लेता है। दोनों देशों के रिश्ते दशकों पुराने हैं। कई कोशिशों के बावजूद यह रिश्ता लगातार मजबूत हुआ है। भारत का अपने हितों के मुताबिक दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ संबंध विकसित करना स्वाभाविक है। भारतीयों की मेहनत और प्रतिभा के बदौलत भारत दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ। पुतिन ने भारत की आर्थिक प्रगति का क्रेडिट पीएम मोदी को दिया। अनुमान है कि भारत रूस व्यापार आगे बढ़कर 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। व्लादमीर पुतिन की ये बातें और सुखोई 57 का ऑफर डोनाल्ड ट्रंप की चिंताओं को बढ़ाने के लिए काफी है। साथ ही यह बात भारत के दो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन की बेचैनी को सातवें आसमान पर ले जाएंगी।
अमेरिका के पास दुनिया का सबसे ताकतवर एयर डोमिनेंस फाइटर जेट लॉक हीड मार्टिन F52 रैप्टर है। सबसे एडवांस्ड मल्टी रोल फाइटर F35 लाइटनिंग टू देने का ऑफर अमेरिका पहले ही भारत को दे चुका है। चीन के पास J20 माइटी ड्रैगन फाइटर जेट है और यह चीन का फिफ्थ जनरेशन स्टिल्थ फाइटर जेट है। यह एशिया पेसिफिक में सबसे ताकतवर माना जाता है। लेकिन अब रूस ने भारत को सुखोई यानी कि एसयू 57 और साथ में उसे बनाने तक का ऑफर दे दिया। यहां तक कि रूस ने कहा कि वो टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने को पूरी तरह से तैयार है। ऐसे में भारत के लिए यह डील काफी फायदेमंद हो सकती है। Sukoi 57 अमेरिका के F22 और F35 का रूसी जवाब माना जाता है। आखिर रूस के इस फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट में क्या खास है कि दुनिया भर के कई मुल्क इसे हासिल करना चाहते हैं। लेकिन रूस इसे बनाने का ऑफर भी भारत को दे रहा है। Sukoi 57 दुनिया के सबसे मेन्यूरेबल फाइटर जेट्स में से एक है। 3D थ्रस्ट इंजन और रिलैक्स्ड स्टेबिलिटी डिजाइन की वजह से यह एक्सट्रीम मूवमेंट्स कर सकता है। जिसकी वजह से क्लोज कॉम्बैट में यह Sukhoi 57 बेहद खतरनाक साबित हो जाता है। इसकी दूसरी सबसे खास बात ये कि सुपर क्रूज क्षमता वाला यह फाइटर जेट ये मैक 1.3 की स्पीड से ट्रैवल कर सकता है। इससे ईंधन की बचत होती है, रेंज बढ़ती है और मिसाइलों का प्रभाव इसमें काफी ज्यादा बढ़ जाता है। मिसाइलों की प्रभावी दूरी इसमें बढ़ जाती है। अधिकतम स्पीड इसकी मैक टू मानी जाती है। Sukoi 57 के अंदर हथियार रखने की भी व्यवस्था है। जिसकी वजह से इसका रडार क्रॉस सेक्शन काफी ज्यादा कम है। यह एक साथ 60 टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है और एक बार में उनमें से 16 पर हमले कर सकता है। इसके अंदर एडवांस्ड सेंसर फ्यूज़, साइड लुकिंग रडार्स और इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम लगे हुए हैं। इसकी ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी से पायलट का वर्क लोड काफी ज्यादा कम हो जाता है। यह भारी हथियार ले जाने में सक्षम है। लॉन्ग रेंज एयर टू एयर मिसाइल के साथ क्रूज मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियार भी इसके माध्यम से ले जाया जा सकता है। ऐसे में भारत की डील इसके साथ होना और इसका भारत में बनना यह भारत के लिए गौरवान्वित करने वाला क्षण है।
भारत अपना एमका बना रहा है। आज से 40 साल बाद का भारत अलग होगा और हम हमाशे किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रह सकते। रूस से हमारे बहुत पुराने समझौते हैं तो हमको उसको भी साथ लेकर चलना होता है। रूस ने अधिकतर जंगों में भारत का मतलब यूए यूनाइटेड नेशन से लेकर कई ऐसे फोरम्स में साथ देता है। अब भारत थोड़े से थिंकिंग मोड में है कि रूस के पास जाए या अमेरिका से बात करें या खुद का डेवलप करें। हालांकि खुद के डेवलप में कोई डाउट नहीं है। लेकिन हां रूस और अमेरिका के ऑफर्स के बीच भारत थोड़ा सा पेंच में है। जिओपॉलिटिक्स में आप किसी को नाराज नहीं करना चाहते दोनों में से। दोनों से आपके अमेरिका से प्रेसिडेंट ट्रंप की जो कुछ अभी जो टैरिफ लगा रहे हैं वो उसकी वजह से कुछ संबंध खराब या संबंध में थोड़ी सी मतलब खराबी आई है या उस तरीके से नहीं रहे कि अमेरिका हमारा दुश्मन बन गया है। अब देखना ये है कि भारत अभी यहां पर क्या स्टैंड लेता है?