By अभिनय आकाश | Oct 30, 2026
वो देश जिसे दुनिया एक कट्टर यहूदी राष्ट्र के रूप में जानती है, अब अपनी राजनीतिक चाबी उन अरब पार्टियों के हाथों में सौंपने जा रहा है जिन्हें वह कभी मुख्यधारा का हिस्सा मानता ही नहीं था। अक्टूबर 2026 के इजराइली संसदीय चुनाव के नतीजों ने ना सिर्फ इजराइल बल्कि पूरी दुनिया के भू राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया। 120 सीटों वाली इस संसद में ना तो बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को बहुमत मिला और ना ही विपक्ष के नेता गदी आइजेनकोर्ट के मध्यम मार्गी गुट को बहुमत के जादुई आंकड़े यानी कि 61 सीटों से दोनों ही दूर रह गए और इसी त्रिशंकु संसद के बीच से निकलकर सामने आई एक ऐसी सच्चाई जिसने पारंपरिक यहूदी राष्ट्रवादियों की रातों की नींद उड़ा दी है। अरब पार्टियां किंग मेकर बन चुकी हैं। लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल तब आया जब विपक्ष के यहूदी नेता गादी आइजनेकोर्ट ने परंपराओं को तोड़ते हुए अरब गुट के नेताओं से मुलाकात की। इस पूरे डर और बहस की जड़ में है वो मुलाकात जो चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद देखी गई। विपक्ष के नेता गदी आइजेनकोट जो खुद इजराइल के सैन्य प्रमुख आईडीएफ चीफ रह चुके हैं और सुरक्षा के मामले में एक सख्त यहूदी चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने अरब गुट के नेताओं से हाथ मिलाया। इतिहास गवाह है कि इजराइल की मुख्यधारा की यहूदी पार्टियां अरब पार्टियों को हमेशा ही गैर जायनवादी यानी कि नॉन जायनिस्ट मानकर सत्ता के गलियारों से दूर रखती आई हैं। उन्हें डर रहता था कि अरब पार्टियों को शामिल करने से देश की सुरक्षा और खुफिया फैसलों से समझौता हो सकता है।