By अनन्या मिश्रा | Sep 09, 2026
अगर परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या किसी करीबी रिश्तेदार को टाइप 2 डायबिटीज है। तो इसको फैमिली बीमारी मानकर नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। क्योंकि फैमिली हिस्ट्री डायबिटीज के अहम जोखिम कारकों में से एक है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फैमिली में डायबिटीज होने पर यह बीमारी आपको भी होगी। टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम कई चीजों के मिले-जुले प्रभाव से बढ़ता है।
खासतौर पर माता-पिता या भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तेदार को अगर डायबिटीज है, तो अन्य लोगों की तुलना में व्यक्ति को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
दादा-दादी को डायबिटीज होना भी पारिवारिक जोखिम का कारण हो सकता है। हालांकि केवल एक रिश्तेदार की बीमारी देखकर इस जोखिम का आकलन नहीं करना चाहिए। फैमिली में कितने लोगों डायबिटीज है, किस उम्र में यह बीमारी हुई, साथ में हाई बीपी और मोटापे जैसे जोखिम हैं या नहीं, इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
डायबिटीज का जोखिम सिर्फ जीन से तय नहीं होता है। बल्कि इसको समझने के लिए लाइफस्टाइल और जेनेटिक्स दोनों को साथ में देखना जरूरी है। कुछ लोगों में ऐसे आनुवंशिक बदलाव हो सकते हैं, जोकि शरीर को इंसुलिन संवेदनशीलता और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने की क्षमता को प्रभावित करता है। लेकिन जीन होने का अर्थ यह नहीं होता है कि यह बीमारी निश्चित रूप से विकसित होगी।
वहीं परिवारों में सिर्फ जीन ही साझा नहीं होते हैं, बल्कि खाने-पीने की आदतें, फिजिकल एक्टिविटी का स्तर और लाइफस्टाइल भी अक्सर सामान्य रहती है। जिस वजह से परिवार में डायबिटीज होने पर जोखिम को सिर्फ आनुवांशिक कारणों से समझना सही नहीं होगा।
दूसरी तरफ, परिवारों में सिर्फ जीन ही साझा नहीं होते, बल्कि खाने-पीने की आदतें, शारीरिक गतिविधि का स्तर और जीवनशैली भी अक्सर समान होती है। यही कारण है कि परिवार में डायबिटीज होने पर जोखिम को केवल आनुवंशिक कारणों से समझना सही नहीं होगा।
फैमिली हिस्ट्री, उम्र और आनुवंशिक/वंशानुगत कारकों को नहीं बदला जा सकता है, लेकिन फिजिकल एक्टिविटी और वेट जैसे कई अन्य जोखिम कारकों पर काम करके इस खतरे को कम किया जा सकता है।
अगर फैमिली में पहले से किसी को डायबिटीज है, तो सबसे जरूरी बात यह है कि जेनेटिक जोखिम को बदला नहीं जा सकता है। लेकिन इसके ऊपर जुड़ने वाले लाइफस्टाइल के खतरे को कम किया जा सकता है।
टाइप 2 डायबिटीज लंबे समय तक बिना लक्षणों के भी रह सकती है। इसलिए सिर्फ लक्षण दिखने का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है। लेकिन आप इन लक्षणों के दिखने पर डायबिटीज की जांच करवा सकते हैं।
बार-बार पेशाब आना
वेट कम होना
बहुत ज्यादा प्यास लगना
लगातार थकान महसूस होना
धुंधला दिखना
बार-बार संक्रमण होना या घाव भरने में देरी होना
नियमित रूप से मेडिटेशन और एक्सरसाइज करें।
शुगरी ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए।
पर्याप्त पानी पीना चाहिए।
रोजाना रात में करीब 6 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए।
तनाव से दूर रहने के लिए दोस्तों से बात करें या फिर कोई फन एक्टिविटी करें।
बाहर का तलाभुना और जंक फूड खाना बंद करें और घर की हेल्दी डाइट लेनी चाहिए।