Kim Jong Un को जिन्होंने वोट नहीं किया उनका क्या होगा? जानें- उत्तर कोरिया में कैसे होते हैं चुनाव

By अभिनय आकाश | Mar 19, 2026

फर्ज कीजिए कि किसी देश में चुनाव हो और लोग लाइन लगाकर धड़ाधड़ वोट देने पहुंच जाते हैं। मानों की धुरंधर-2 फिल्म की फ्री स्क्रिनिंग रखी गई हो और उसका टिकट पाने के लिए पहले मैं-पहले मैं करके कतार में लोग मारा-मारी करते नजर आए। अब माहौल ऐसा होगा तो मतदान का प्रतिशत भी ऊपर जाएगा। कितना? 99.99 प्रतिशत मानो इतने नंबर अगर परीक्षा में आ जाएं तो देश के बड़े से बड़े कॉलेज-यूनिवर्सिटी में दाखिला झट से मिल जाए। अब अगर वोटिंग टर्न आउट 100 प्रतिशत के करीब रहा हो तो हैरत तो हर किसी को होगी। लेकिन रूको जरा, अभी तो और भी ट्विस्ट बाकी है। इस 99.99 % वोटिंग टर्न आउट में जीतने वाली पार्टी को 99.93 प्रतिशत वोट प्राप्त होते हैं। आप कहेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है। हो सकता है जब देश नॉर्थ कोरिया हो तो सब हो सकता है। 

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उत्तर कोरिया में कैसे होते हैं चुनाव

उत्तर कोरिया में चुनाव का मतलब वह नहीं है जो हम आम तौर पर समझते हैं। यहाँ चुनाव जनता की पसंद चुनने के लिए नहीं, बल्कि सरकार की ताकत और एकता दिखाने के लिए आयोजित किए जाते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर इस देश में वोटिंग कैसे होती है। 

चुनावी प्रक्रिया

उत्तर कोरिया के हर निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक ही उम्मीदवार खड़ा होता है। इस उम्मीदवार का चयन पहले ही सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा कर लिया जाता है। वोटिंग के दिन, मतदाता को एक बैलेट पेपर दिया जाता है जिस पर उसी इकलौते उम्मीदवार का नाम लिखा होता है।

वोट देने का तरीका

यहाँ वोट देना बहुत आसान है, लेकिन विरोध करना बेहद मुश्किल।

अगर आप उम्मीदवार के पक्ष में हैं, तो आपको बस वह कागज बिना किसी बदलाव के बॉक्स में डाल देना है।

लेकिन अगर आप विरोध करना चाहते हैं, तो आपको अधिकारियों की नजरों के सामने उम्मीदवार के नाम को काटना होगा।

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निगरानी और रिस्क

हाल के वर्षों में कुछ छोटे बदलाव जरूर किए गए हैं।जैसे कुछ स्थानों पर ‘हाँ’ और ‘नहीं’ के लिए अलग-अलग मतपेटियाँ रखी गईं। लेकिन मूल व्यवस्था अभी भी वही बनी हुई है। हर सीट पर पहले से तय एक ही उम्मीदवार होता है और मतदाताओं के पास केवल समर्थन या विरोध जताने का विकल्प रहता है। इस प्रक्रिया में यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि अधिकारियों को यह जानकारी रहे कि किसने समर्थन में वोट दिया और किसने विरोध में। ऐसे माहौल में विरोध दर्ज कराना काफी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि मतदाताओं पर निगरानी रखी जाती है और उनके खिलाफ कार्रवाई की आशंका बनी रहती है। मतदान लगभग अनिवार्य होता है। स्थानीय प्रशासन मतदाताओं की पूरी सूची तैयार रखता है, जो किसी हद तक जनगणना का भी काम करती है। जो लोग मतदान नहीं कर पाते—जैसे समुद्र में कार्यरत नाविक या विदेश में रहने वाले नागरिक उन्हें भी आधिकारिक आँकड़ों में शामिल किया जाता है। हाल के आँकड़ों के अनुसार, केवल 0.0037% लोग ही मतदान नहीं कर सके, जबकि मात्र 0.00003% लोगों ने स्वेच्छा से मतदान से दूरी बनाई।

नतीजे और भविष्य

चुनाव के बाद नई असेंबली बुलाई जाती है, जिसका काम केवल किम जोंग-उन की नीतियों पर मुहर लगाना होता है। इस बार चर्चा है कि किम की बहन, किम यो-जोंग को और भी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। साथ ही, किम जोंग-उन का अपनी बेटी के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखना यह संकेत देता है कि उन्हें भविष्य के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किया जा रहा है। 99.93% समर्थन का आँकड़ा भले ही असाधारण लगे, लेकिन उत्तर कोरिया में यह कोई नई बात नहीं है। 2019 के चुनावों में भी लगभग ऐसे ही परिणाम सामने आए थे, जहाँ मतदान प्रतिशत 99.99% बताया गया था। पूरी चुनावी प्रक्रिया एक सुनियोजित प्रदर्शन जैसी होती है, जिसमें एकता दिखाने पर जोर दिया जाता है। वास्तव में न तो कोई प्रतिस्पर्धा होती है, न ही विपक्ष की कोई प्रभावी भूमिका, और इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी भी संभव नहीं होती।

अब आगे क्या

 मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किम जोंग उन अपनी बेटी को उत्तराधिकारी बनाने का फैसला भी कर चुके हैं। यौनहप न्यूज़ एजेंसी ने हालिया चुनाव के बारे में बताया था कि पिछली बार की तुलना में इस बार 70% पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। यानी पावर स्ट्रक्चर में ताबड़तोड़ बदलाव किए जाएंगे। इन चुनावों में किम जोंग की बहन किम यो जोंग भी संसद पहुंची हैं। कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक सदन अब एक बैठक करेगा और किम जोंग उनको देश का सुप्रीम लीडर चुन लिया जाएगा। दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों को लेकर संविधान में बदलाव करने हैं या नहीं, विदेश नीति पर कुछ फैसले करने हैं या नहीं? ऐसे तमाम मुद्दों पर फैसले किए जाएंगे।  अब नई चुनी गई संसद जल्द ही बैठक करेगी, जहाँ सरकार की नीतियों को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी। इसमें किम जोंग-उन की पाँच वर्षीय आर्थिक योजना और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। उनकी बहन किम यो-जोंग को लेकर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव के बाद उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वहीं हाल के समय में किम जोंग-उन अपनी बेटी के साथ कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आए हैं, जिसे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। 

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