By दिव्यांशी भदौरिया | May 24, 2026
अक्सर महिलाओं में ब्लोटिंग यानी पेट फूलने की समस्या काफी देखने को मिलती है। कई बार इसे गैस, बाहर का खाना, तनाव, हार्मोनल बदलाव या पीरियड्स से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर कभी-कभार पेट फूलना चिंता की बात नहीं होती, लेकिन अगर पेट लगातार फूलता रहे और लंबे समय से ठीक न हो, तो इसे गलती से भी इग्नोर न करें। यह शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
खासतौर पर महिलाओं को यह समझना जरुरी है कि पेट फूलना कई बार अंडाशय यानी ओवरी के कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। बार-बार पेट फूलना कैंसर का संकेत नहीं हो सकता है, बल्कि यह समस्या कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरुरी है। शुरुआती स्टेज पर कैंसर का पता लगाना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण बेहद ही सामान्य होते हैं।
ब्लोटिंग में शरीर क्या संकेत देता है
-पेट या पेल्विक एरिया में दर्द
-पेट भारी लगना
-भूख कम लगना
-थोड़ा खाने पर पेट भर जाना
-बेवजह वजन बढ़ना या घटना
-बार-बार पेशाब आना
-कब्ज
-थकान
हमेशा पेट फूलना कैंसर नहीं हो सकता है
यह बिल्कुल सच है कि हर बार पेट फूलना कैंसर नहीं होता। कुछ मामलों में पेट फूलने का कारण गैस, कब्ज, तनाव, हार्मोनल बदलाव, तला-भुना मसालेदार भोजन या पीरियड्स हो सकते हैं। लेकिन समस्या तब होती है, जब महिलाएं बिना ध्यान रखें इसे सामान्य मान लेती है, लक्षण कब से महसूस हो रहे हैं, कितनी बार होते हैं, इन सब पर ध्यान देना काफी जरुरी है।
किन महिलाओं को ओवरी कैंसर का खतरा ?
जिन महिलाओं के परिवार में ओवरी, ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा है, उनमें जोखिम बढ़ सकता है। इसके साथ ही बढ़ती उम्र, मोटापा, सिगरेट की लत, एंडोमेट्रियोसिस और कुछ आनुवंशिक बदलाव भी खतरा बढ़ जाता है। वहीं, जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर का इतिहास नहीं रहा है, उन लोगों को यह बीमारी हो सकती हैं, इसलिए हमेशा जागरुक रहना जरुरी है।
शरीर के बदलावों पर ध्यान दें
महिलाएं अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें। अचानक से कपड़े कमर पर तंग लगने लगें, पेट लगातार फूला रहे या खानपान बदलने के बाद भी समस्या बनीं रहती है, तो महिला की जांच जरुरी है। महिला को पेल्विक टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या कुछ ब्लड टेस्ट करने होते हैं। इनसे बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है।
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं
महिलाओं का अपनी सेहत पर ध्यान देना जरुरी है। बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी पीना, सिगरेट से परेहज करना और वजन को कंट्रोल में रखना शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके साथ ही रेगुलर हेल्थ चेकअप कर सकते हैं।
30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को समय-समय पर अपनी जांच, सोनोग्राफी और जरूरी टेस्ट कराने चाहिए। यदि बीमारी का पता लग जाए तो इलाज आसान हो सकता है और गंभीर उपचार की जरुरत कम पड़ सकती है।