Health Tips: हड्डियों की 'कट-कट' आवाज कब है नॉर्मल और कब है खतरे की घंटी? जानिए सच्चाई

By अनन्या मिश्रा | Jul 07, 2026

आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की समस्याएं बढ़ती हैं। लेकिन अब कम उम्र में भी लोग इसका शिकार हो रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह खराब लाइफस्टाइल और पोषक तत्वों की गड़बड़ी है।  अगर आपको भी उठने-बैठने के दौरान हड्डियों के चटकने की कट-कट आवाज आती है, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। आमतौर पर माना जाता है कि कट-कट की आवाज का मतलब हड्डियां घिस रही हैं, लेकिन हर चटकने वाली आवाज की यही वजह हो ऐसा जरूरी नहीं है।

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हड्डियों की दिक्कतें

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक लोगों की खराब हो रही लाइफस्टाइल जैसे घंटों तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी में कमी होना और मोटापे की समस्या ने हड्डियों की समस्या को काफी हद तक बढ़ा दिया है।

वहीं विटामिन डी और कैल्शियम की कमी का भी हड्डियों और जोड़ों पर असर होता है।

उम्र बढ़ने के अलावा शरीर में होने वाले बदलाव भी जोड़ों की समस्याओं को बढ़ा रहे हैं।

हड्डियों या जोड़ों से क्यों आती है चटखने की आवाज

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक जोड़ों से आने वाली चटकने की आवाज को मेडिकल भाषा में क्रेपिटस कहा जाता है। आमतौर पर यह सामान्य मानी जाती है।

जोड़ों के अंदर मौजूद सिनोवियल फ्लूइड में घुली गैसें दबाव के बदलने पर छोटे बुलबुले बनाती और फूटती है। जिससे यह चटकने की आवाज आती है।

वहीं टेंडन या लिगामेंट का हड्डी के ऊपर से खिसकने से भी ऐसी आवाजें पैदा कर सकता है।

अगर चटकने की आवाज बिना दर्द या सूजन के आती है, तो इसको चिंता नहीं मानी जाती है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा

आमतौर पर कार्टिलेज का घिसाव उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकता है। इसलिए बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।

वहीं वेट ज्यादा होने से भी कूल्हों और घुटनों पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है।

फिजिकल एक्टिविटी में कमी, लंबे समय तक बैठे रहने वालों में या फिर घुटनों पर चोट की वजह भी आपको कई दिक्कतें हो सकती हैं।

महिलाओं में मेनोपॉज होने के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जिससे कट-कट की आवाज आ सकती हैं।

ऐसे करें बचाव

एक्सपर्ट के मुताबिक अगर हड्डियों के चटकने के साथ-साथ सूजन, तेज दर्द या जोड़ गर्म महसूस होते हैं। या फिर बार-बार लॉक होने की वजह से चलने में समस्या हो रही है, तो इसकी जांच जरूर कराएं।

वहीं नियमित व्यायाम और फिजिकट एक्टिविटी से जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है।

वेट कंट्रोल में रखने से कूल्हों और घुटनों पर अनावश्यक भार कम होता है।

वहीं संतुलित डाइट लेनी चाहिए। अपनी डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन डी वाली चीजों को शामिल करें। इससे हड्डियां मजबूत होती है।

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