Prabhasakshi NewsRoom: जब Iran हार ही नहीं मान रहा, तब Trump जीत का दावा कैसे कर सकते हैं?

By नीरज कुमार दुबे | Mar 12, 2026

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान वैश्विक राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रहा है। दरअसल ट्रंप ने एक जनसभा में खड़े होकर जोरदार अंदाज में ऐलान कर दिया कि अमेरिका इस युद्ध को जीत चुका है। लेकिन सवाल यह है कि जब ईरान खुलकर कह रहा है कि वह झुकने को तैयार नहीं है और उसने युद्ध समाप्त करने के लिए कड़ी शर्तें रख दी हैं, तब आखिर ट्रंप किस जीत का ऐलान कर रहे हैं?

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लेकिन हैरानी की बात यह है कि जीत का यह दावा करते हुए खुद ट्रंप ने उसी भाषण में यह भी कहा कि जीत का ऐलान करते समय सावधान रहना चाहिए। यानी पहले उन्होंने युद्ध समाप्त होने और अमेरिका की जीत की बात कही और तुरंत बाद अपने ही बयान से पीछे हटते नजर आये। यही विरोधाभास अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमले अब भी जारी हैं, तब यह जीत कैसी। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि अगर अमेरिका सचमुच जीत गया है तो फिर अमेरिकी सैनिक अब तक घर क्यों नहीं लौटे?

दरअसल जमीन पर हालात बिल्कुल अलग कहानी बता रहे हैं। पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष अब अपने तेरहवें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले किये थे, जिसके बाद से लगातार हमले और जवाबी हमले हो रहे हैं। अब तक इस संघर्ष में लगभग बारह सौ लोगों की जान जा चुकी है।

इस बीच, ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन स्पष्ट शर्तें सामने रख दी हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रूस और पाकिस्तान से बातचीत के बाद यह संदेश दिया है कि अगर वास्तव में शांति चाहिए तो सबसे पहले ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देनी होगी। दूसरी शर्त यह रखी गयी कि युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की जाये। तीसरी और सबसे अहम शर्त यह है कि भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रमण को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस गारंटी दी जाये।

इन शर्तों से साफ संकेत मिलता है कि ईरान पीछे हटने के मूड़ में नहीं है। बल्कि वह इस संघर्ष को अपने अधिकारों की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है। अगर कोई देश अपनी शर्तों के साथ बातचीत की मेज पर खड़ा है, तो इसे उसकी हार कैसे कहा जा सकता है?

यहीं से सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है। जब ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए कठोर शर्तें रख रहा है, जब संघर्ष जारी है, जब अमेरिकी सैनिक अब भी पश्चिम एशिया में तैनात हैं, तब ट्रंप किस आधार पर जीत का दावा कर रहे हैं?

युद्ध के मैदान में जीत का मतलब होता है विरोधी का झुक जाना या संघर्ष का समाप्त हो जाना। लेकिन यहां तो दोनों में से कोई भी स्थिति नजर नहीं आती। उलटे हालात यह दिखा रहे हैं कि संघर्ष और फैल सकता है।

देखा जाये तो इस युद्ध का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। ईरान के तेल टैंकरों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। यानी यह संघर्ष केवल दो या तीन देशों का मामला नहीं रह गया बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है।

ट्रंप के बयान के बाद एक और सवाल उठ रहा है कि क्या यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है? अक्सर चुनावी माहौल या घरेलू दबाव के समय नेता युद्ध को जीत के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं, भले ही जमीन पर स्थिति अलग हो। सवाल उठता है कि अगर वास्तव में युद्ध समाप्त हो चुका है तो फिर मध्य पूर्व में अमेरिकी दूतावासों से कर्मचारियों को निकालने की तैयारी क्यों चल रही है? अगर जीत मिल चुकी है तो फिर क्षेत्र में तनाव लगातार क्यों बढ़ रहा है?

यही विरोधाभास ट्रंप के दावे को कमजोर करता है। एक तरफ जीत का ऐलान, दूसरी तरफ जारी संघर्ष। एक तरफ विजय की घोषणा, दूसरी तरफ ईरान की कड़ी शर्तें। पश्चिम एशिया का यह युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि राजनीतिक बयानबाजी की जंग भी बन चुका है। ट्रंप का विजय दावा और ईरान की शर्तें इस टकराव को और तीखा बना रही हैं। हालांकि सच यही है कि जब तक गोलियां चल रही हैं, जब तक सैनिक मोर्चे पर खड़े हैं और जब तक बातचीत की मेज पर शर्तों की लड़ाई जारी है, तब तक किसी भी पक्ष की जीत का ऐलान केवल शब्दों का शोर लगता है, हकीकत नहीं। और यही वह सवाल है जो आज पूरी दुनिया पूछ रही है। जब ईरान हार नहीं मान रहा, तब ट्रंप आखिर जीत कैसे गये?

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