By अभिनय आकाश | Oct 09, 2026
सरकार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के ज़रिए बड़े पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने को कुछ महीनों के लिए टालने पर विचार कर रही है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने इंडस्ट्री के एक एग्जीक्यूटिव और बातचीत की जानकारी रखने वाले एक रेगुलेटरी अधिकारी के हवाले से बताया है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाली फीस अब जनवरी से लागू हो सकती है। मनीकंट्रोल ने सबसे पहले इसके लागू होने में देरी की खबर दी थी। हालांकि प्रभासाक्षी इस जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। नए MDR फ्रेमवर्क के तहत, ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट लेने वाले मर्चेंट्स को ट्रांज़ैक्शन वैल्यू का 0.4% फ़ीस देनी होगी। पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफ़र पर यह चार्ज नहीं लगेगा, और कुछ खास कैटेगरी में पेमेंट करने पर रकम चाहे कितनी भी हो, ₹5 की फ़्लैट फ़ीस लगेगी।
संसद ने 11 अगस्त को 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को मंज़ूरी दी। इसके तहत 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की धारा 10A में बदलाव किया गया, ताकि सरकार को कुछ खास डिजिटल पेमेंट तरीकों पर चार्ज लगाने की इजाज़त मिल सके। पिछले महीने नया फ्रेमवर्क लागू होने के बाद, ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर दो तरह की फीस लगेगी। पहली फीस चार खास कैटेगरी रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और फ्यूल में मर्चेंट को किए जाने वाले पेमेंट पर प्रति ट्रांज़ैक्शन ₹5 का फ्लैट MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) है। दूसरा नियम ₹2,000 से ज़्यादा के दूसरे पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4% का MDR लगाता है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांज़ैक्शन ₹300 है। उदाहरण के लिए, अगर रेलवे टिकट काउंटर, टेलीकॉम ऑपरेटर, इंश्योरेंस कंपनी या फ्यूल आउटलेट पर ₹10,000 का UPI पेमेंट किया जाता है, तो मर्चेंट से ₹5 का चार्ज लिया जाता है। अगर किसी दूसरे मर्चेंट को पेमेंट किया जाता है, तो चार्ज 0.4% यानी ₹40 होता है। UPI पेमेंट की चार कैटेगरी को इस चार्ज से छूट दी गई है – पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI ट्रांसफर, ₹2,000 तक के P2M पेमेंट, पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट (P2PM) पेमेंट और सभी RuPay डेबिट कार्ड ट्रांज़ैक्शन। P2PM एक ऐसी कैटेगरी है जिसमें छोटे वेंडर शामिल हैं जो UPI QR के ज़रिए सीधे अपने बैंक अकाउंट में महीने में ₹1 लाख तक की रकम पाते हैं।