Yes Milord: जूडिशल टेरर का जिक्र करते-करते CJI गवई ने अचानक सुनाया हेमा मालिनी का वो किस्सा, लगे जोरदार ठहाके

By अभिनय आकाश | Jun 28, 2025

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई ने गुरुवार को नागपुर जिला बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में बोलते हुए न्यायिक सक्रियता के नाम पर न्यायिक अतिक्रमण के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक सक्रियता बनी रहेगी, लेकिन इसे न्यायिक दुस्साहस या न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र के तीन अंगों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संवैधानिक सीमाओं को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।

न्यायमूर्ति गवई ने पिछले महीने भारत के 52वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इसी के सम्मान में नागपुर जिला न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को वह संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि बाद में जब उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद के लिए मेरे नाम की सिफारिश की गई तो मेरे पिता ने कहा कि अगर तुम वकील बने रहोगे तो सिर्फ पैसे के पीछे भागोगे, लेकिन अगर तुम न्यायाधीश बनोगे तो आंबेडकर द्वारा बताए गए रास्ते पर चलोगे और समाज का भला करोगे। न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि उनके पिता भी चाहते थे कि उनका बेटा एक दिन भारत का प्रधान न्यायाधीश बने, लेकिन वह ऐसा होते देखने के लिए जीवित नहीं रहे। उन्होंने कहा कि हमने उन्हें 2015 में खो दिया, लेकिन मुझे खुशी है कि मेरी मां अब भी हमारे बीच हैं। 

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हेमा मालिनी का मजेदार किस्सा 

प्रधान न्यायाधीश को तुरंत ही यह अहसास हो गया कि दर्शक भावुक हो गए हैं और शायद माहौल को हल्का करने के लिए उन्होंने एक घटना को साझा किया जब नागपुर जिला अदालत में अभिनेत्री हेमा मालिनी के खिलाफ चेक बाउंस का मामला दर्ज किया गया था एवं उन्हें तथापूर्व मुख्य न्यायाधीश शरद बोबड़े को हेमा मालिनी की ओर से बतौर वकील पेश होना था। उन्होंने हंसते हुए कहा उस दिन हेमा मालिनी की एक झलक पाने के लिए अदालत कक्ष में काफी भीड़ थी, लेकिन हम इस भीड़ के बीच उस पल का आनंद लेने से खुद को रोक नहीं सके। इस बयान पर वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे और माहौल हल्का हो गया। 

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न्यायिक आतंकवाद नहीं

सीजेआई गवई ने न्यायपालिका पर बात करते हुए कहा कि न्यायिक सक्रियता बनी रहेगी, लेकिन इसे न्यायिक दुस्साहस या न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के तीनों अंगों- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका- के लिए सीमाएं निर्धारित की गई हैं। तीनों अंगों को कानून और उसके प्रावधानों के अनुसार काम करना होगा। जब संसद कानून या नियम से परे जाती है, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप कर सकती है। सीजेआई गवई ने कहा कि हालांकि, मैं हमेशा कहता हूं कि न्यायिक सक्रियता बनी रहेगी, लेकिन इसे न्यायिक दुस्साहस और न्यायिक आतंकवाद में बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। 

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