दुनिया ईरान सीजफायर में लगी इधर बॉर्डर पर बड़ा 'धमाका', 72 घंटे में क्या करने जा रहा भारत? जारी हुआ NOTAM

By अभिनय आकाश | Apr 08, 2026

पाकिस्तान की सीमा के पास भारत कुछ अजीब और बहुत बड़ा खेल कर रहा है। भारत अपने सारे खतरनाक हथियार और सैनिक पाकिस्तान की सीमा पर तैनात कर रहा है। भारत ने बता दें कि 11 से 12 अप्रैल तक यानी कि पाकिस्तानी सीमा पर नोटम जारी कर दिया है। नोट यानी कि नोटिस  टू एयरमैन। एक ऐसा नोटिस जो हवाई क्षेत्रों और हवाई मार्गों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को दर्शाता है। बता दें कि इस नोटिस के माध्यम से एयर स्पेस बंद होने की जानकारी दी जाती है और  बता दें कि दो दिनों के लिए भारत ने इसे लागू किया है। इसे जारी किया है और भारत ने इस पूरे इलाके में नोटम जारी करके एक अपना अलर्ट दे दिया है। लेकिन असली कहानी यहीं से ही शुरू होती है। बता दें कि भारत 11 से 12 अप्रैल को बंगाल की खाड़ी में एक बेहद अहम ट्रायल करने जा रहा है। अब यह ट्रायल क्या है? यह ट्रायल है जीएसएस जैमिंग ट्रायल यानी कि ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम जिसे आप जीपीएस भी कहते हैं। इस जैसे सिस्टम इसमें शामिल होंगे और जैमिंग का मतलब होगा सेटेलाइट सिग्नल को ब्लॉक या फिर उसे बाधित करना। 

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ये सिस्टम कैसे काम करेगा 

जीएनएसएस जैमिंग टेक्नोलॉजी सेटेलाइट से आने वाली सिग्नल को डिस्ट्रप्ट करती है जिससे ड्रोन क्रैश हो सकते हैं। प्रसीजन हथियार जो है वो बेकार हो सकते हैं। जहाज और विमान दिशा खो सकते हैं और सबसे बड़ी बात अहम बात दुश्मन को तुरंत समझ भी नहीं आएगा कि आखिरकार उसका सिस्टम फेल क्यों हुआ। अब ये बंगाल की खाड़ी में ही क्यों हो रहा है उसे समझिए। दरअसल बता दें कि यह इलाका जो है वो बेहद रणनीतिक है। हिंद महासागर के महत्वपूर्ण रूट्स के पास भारतीय नौसेना के ऑपरेशनल ज़ोन के करीब यहां पर ट्रायल हो रहा है और इसका सीधा-सीधा मतलब ये है कि रियल वॉर जैसी परिस्थितियों में टेस्टिंग ट्रायल हो रहा है। अब आप ये समझिए कि टेस्टिंग ट्रायल में क्या-क्या होगा। दरअसल बता दें कि इस दो दिन की एक्सरसाइज में सिग्नल कितनी दूर तक जाम होता है उसे देखा जाएगा। इंटरफेरेंस कितना है यह भी देखा जाएगा और यह कितना पावरफुल है सिस्टम उसकी भी यहां पर टेस्टिंग की जाएगी। कितनी देर तक ये एक्टिव रहता है उसे भी देखा जाएगा और असली हालात में इसकी सटीकता कैसी है इस सब पर भी जांच की जाएगी। भारत की तैयारी कितनी है आगे उस पर भी अब नजर डालते हैं। भारत पहले से ही एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम पर काम कर रहा है। जैसे कि संयुक्ता ईडब्ल्यू प्लेटफार्म और अब यह जो जीएसएस है यह जामिंग ट्रायल जो है यह भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी को एक नए स्तर पर ले जाएगा। अब युद्ध में यह कैसे गेम चेंजर होगा इसके बारे में भी आपको बता देते हैं। दरअसल बता दें कि आज का यह जो युद्ध है यह सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि सिग्नल, डाटा और सेटेलाइट से भी लड़ा जा रहा है। अगर आप दुश्मन के सिग्नल काट दें तो उसकी मिसाइल बेकार हो जाएगी। उसका ड्रोन बेकार हो जाएगा। उसका कमांड सिस्टम तक बेकार हो जाएगा। 

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