UN में किससे भिड़ गए ट्रंप, चीन भी देखता रह गया, जीत गया बलूचिस्तान, संयुक्त राष्ट्र में क्या-क्या हुआ?

By अभिनय आकाश | Sep 20, 2025

पाकिस्तान और चीन को अमेरिका ने एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, पाकिस्तान और उसका करीबी चीन बलूच लिबरेशन आर्मी और उसकी मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी सूची में डालना चाहते थे। लेकिन अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया है। पाकिस्तान और चीन चाहता था कि बीएलए को आतंकी संगठन की सूची में शामिल किया जाए। लेकिन अमेरिका समेत फ्रांस और ब्रिटेन ने इससे हाथ खींच लिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267वीं प्रतिबंध समिती के तहत पाकिस्तान और चीन ने एक प्रस्ताव रखा था। इसमें मांग की गई थी कि बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए और उसका आत्मघाती दस्ता मजीद ब्रिगेड को अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया जाए। 

क्या है संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी प्रतिबंध व्यवस्था

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 1999 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव 1267 पारित किया, जिसके तहत ओसामा बिन लादेन और उसके साथियों को आतंकवादी घोषित किया गया और अल-कायदा, बिन लादेन या तालिबान से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए। यह अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद हुआ। प्रस्ताव में आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने, आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और ओसामा बिन लादेन को सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करने का आरोप लगाया गया था। प्रतिबंध लगाने से एक साल से भी कम समय पहले, बिन लादेन ने केन्या के नैरोबी और तंजानिया के दार एस सलाम में अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी की थी, जिसमें 224 लोग मारे गए थे और 4,000 से ज़्यादा घायल हुए थे। प्रस्ताव 1267 ने प्रतिबंध सूची में व्यक्तियों या संस्थाओं को नामित करने और प्रतिबंध उपायों के कार्यान्वयन की देखरेख करने के लिए एक यूएनएससी समिति की स्थापना की, जिसमें संपत्ति फ्रीज, यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध शामिल थे। प्रारंभ में अल-कायदा और तालिबान से संबंधित होने के बावजूद, समिति के अधिदेश को 2015 में संकल्प 2253 के माध्यम से इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवेंट (आईएसआईएल) को शामिल करने के लिए विस्तारित किया गया था। 

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पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बना बलूचिस्तान

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जिसका क्षेत्रफल 3.47 लाख वर्ग किलोमीटर है और यह देश के लगभग 44% भूभाग पर फैला है। हालाँकि इसकी अवस्थिति और प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से तेल, की प्रचुरता इसे पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है, लेकिन बलूचिस्तान की आबादी कम है और देश के बाकी हिस्सों की तुलना में यहाँ के लोग गरीब हैं। 1948 में जब पूर्ववर्ती बलूच सरदारों को पाकिस्तान में विलय के लिए मजबूर किया गया था, तब से इस प्रांत ने खूनी विद्रोहों, क्रूर सरकारी दमन और एक स्थायी बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन की एक श्रृंखला देखी है। अब तक, बलूचिस्तान में पाँच "स्वतंत्रता संग्राम" हो चुके हैं, जो 1948, 1958-59, 1962-63, 1973-77 और 2005-06 के बाद लड़े गए। पाकिस्तानी सरकार ने इन विद्रोहों से क्रूरता से निपटा है, और उसके सैनिकों पर अपहरण, यातना, मनमानी गिरफ़्तारी और फांसी की कई रिपोर्टें दर्ज की गई हैं। हालाँकि हताहतों की सही संख्या बताना मुश्किल है, लेकिन रूढ़िवादी अनुमान भी यही कहते हैं कि सरकारी दमन में हज़ारों लोग मारे गए हैं। गैर-सरकारी संगठन वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स के अनुसार, सिर्फ़ 2001 से 2017 के बीच लगभग 5,228 बलूच लोग लापता हुए हैं।

बलोच लिबरेशन का क्या मकसद है

बीएलए पाकिस्तान का एक उग्रवादी संगठन है, जिसका मकसद पाकिस्तान से बलूचिस्तान को आजाद कराना है। उनका कहना है कि पाकिस्तान सेना बलूचिस्तान में स्थानीय लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार करती है। पाकिस्तान ने बीएलए को आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान पर इस संगठन को सपोर्ट करने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि भारत और अफगानिस्तान इस आरोप का विरोध करते रहे हैं। हालांकि बलूच लोग पाक के खिलाफ पूरी दुनिया में प्रदर्शन करते हैं।

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मजीद ब्रिगेड का काम क्या है

मजीद ब्रिगेड बलूच लिबरेशन आर्मी के एक स्पेशल विंग है। इस विंग को खास तौर पर आत्मघाती हमलों के लिए भी तैयार किया गया है। इसमें शामिल होने वालों को कठिन ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। मजीद ब्रिगेड का उद्देश्य खुद को समाप्त कर दुश्मन को खास संदेश देना है। इसमें आम तौर पर युवाओं की भर्ती होती है। इसकी स्थापना साल 2011 में हुई थी। इसका नाम बलूचिस्तान के दो सगे भाइयों लांगो और मजीद के नाम पर रखा गया।  इसका नाम पूर्व प्रधान मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के एक गार्ड के नाम पर रखा गया था जो पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के संस्थापक की हत्या के प्रयास में मारा गया था। न्हें सम्मान देने के लिए ब्रिगेड का नाम मजीद ब्रिगेड रखा गया। 

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