कॉकरोच जनता पार्टी किसने बना ली? महुआ-कीर्ति आजाद समेत 5 लाख लोग जुड़े! मैनिफेस्टो तो होश उड़ा देगा

By अभिनय आकाश | May 20, 2026

जब व्यवस्था की सफाई करने के बजाय सिस्टम खुद सड़ने लगता है, तब अंधेरी रातों में, सुनसान राहों पर एक 'मसीहा' निकलता है। जिसे लोग शहंशाह नहीं, बल्कि 'कॉकरोच' कहते हैं! यह एक ऐसा सर्वव्यापी मसीहा है जो कहीं भी प्रकट हो सकता है। आपके चमचमाते किचन में, भारतीय रेल के डिब्बों में, या फिर सरकारी दफ्तर के उस सीलन भरे कमरे में जहां धूल खाती फाइलें सदियों से सो रही हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक इस महान जीव का जिक्र क्यों? तो जनाब, राजनीति के गलियारे से एक ब्रेकिंग न्यूज़ आई। देश की राजनीति में इस वक्त एक ऐसी पार्टी की एंट्री हुई है जिसने बिना चुनाव लड़े, बिना रैलियां निकाले और बिना पोस्टर्स लगाए सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। नाम है कॉकरोच जनता पार्टी यानी कि सीजेपी। सीजेपी का नाम इस समय इंटरनेट पर टॉक ऑफ द टाउन बना हुआ है। सुनने में यह किसी मीम या मजाक जैसा आपको लग सकता है लेकिन इंटरनेट पर इसकी लोकप्रियता अब मजाक से आगे निकलती दिखाई दे रही है। दावा यह किया जा रहा है कि लॉन्च होने के महज कुछ दिनों के भीतर इस पार्टी से हजारों लोग जुड़ चुके हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसके सदस्य खुद को सेकुलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक और लेजी बताते हैं और यही लाइन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। कोई इसे युवाओं की हताशा का नया प्रतीक बता रहा है तो कोई इसे मौजूदा राजनीति पर सबसे बड़ा व्यंग मान रहा है। लेकिन सवाल सबसे बड़ा यहां पर यह है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ इंटरनेट का मजाक है या फिर सिस्टम से नाराज युवाओं की नई डिजिटल आवाज। दरअसल इस पूरी कहानी की शुरुआत एक विवादित टिप्पणी से हुई जिसमें बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्ट को लेकर कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। पार्टी के नाम कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर भी चर्चा है। माना यह जा रहा है कि यह नाम हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी पर आधारित है। जिसमें उन्होंने यह कहा था कि कुछ युवा कॉकरोच जैसे होते हैं जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और वह सोशल मीडिया, मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। हालांकि बाद में सीजीआई ने सफाई भी दी थी और कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। जिस दिन सीजीआई सूर्यकांत ने कॉकरोच वाली टिप्पणी की उसी दिन यानी 16 मई को अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया एक्स पर लोगों से कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्टर करने की अपील की। साफ कर दें कि इस पार्टी का मकसद चुनाव लड़ना नहीं है। यह व्यंग करने वाला एक पॉलिटिकल आउटफिट है। पार्टी में शामिल होने की दिलचस्प शर्तें बताएं। उससे पहले बता दें कि कॉकरोच वाली जो टिप्पणी सीजीआई सूर्यकांत ने की थी, उस पर बाद में उन्होंने साफ किया कि उनकी मौखिक टिप्पणी फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल करके कानून और मीडिया जैसे पेशों में एंट्री करने वाले लोगों के लिए थी ना कि बेरोजगार युवाओं के लिए। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कौन सी 'जनता' इस अनूठी पार्टी की रीढ़ बन रही है और इस पार्टी का वीआईपी मेंबर बनने के लिए क्या योग्यताएं चाहिए? चलिए आज इसी का एमआईआर स्कैन करते हैं।

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बाद में अपने बयान पर दी सफाई 

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को अपने विवादास्पद "तिलचट्टे" वाले बयान पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनके मौखिक कथनों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और उन्हें देश के युवाओं की आलोचना के रूप में पेश किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने स्पष्टीकरण में कहा kf मुझे यह पढ़कर बहुत दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान मेरे मौखिक कथनों को गलत तरीके से उद्धृत किया है। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी जिन्होंने फर्जी और फर्जी डिग्रियों की मदद से वकालत जैसे पेशे में प्रवेश किया है। ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं, इसलिए वे परजीवी की तरह हैं। यह कहना पूरी तरह निराधार है कि मैंने हमारे देश के युवाओं की आलोचना की है।

कॉकरोच जनता पार्टी में शामिल होने की 'खास' योग्यताएं

आप चाहे जितने भी घोटालों, विवादों या जनता के गुस्से की मार झेलें, आपका बाल भी बांका नहीं होना चाहिए। जैसे कॉकरोच परमाणु हमले में भी बच सकता है, वैसे ही आपको हर राजनीतिक संकट में 'अमर' रहना होगा। इस पार्टी का सबसे बड़ा और मजबूत आधार है देश की बेरोजगार सेना। अगर आपके पास करने को कोई काम नहीं है और आप दिन भर क्या करें, क्या न करें के चक्रव्यूह में फंसे हैं, तो आप इस पार्टी के मेंबर बनने के लिए सबसे उपयुक्त हो। इसके अलावा यदि आपकी सुबह सूरज की रोशनी से नहीं, बल्कि रील स्क्रॉल करने से होती है। अगर आपकी उंगलियां बिना वजह हर दो सेकंड में स्क्रीन अनलॉक कर देती हैं, तो बधाई हो! आप पार्टी के आईटी सेल के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं। दुनिया में दुख बहुत है, लेकिन उस दुख को, उस गुस्से को बिना गाली-गलौज के, एकदम 'प्रोफेशनल' तरीके से, कीबोर्ड पर टाइप करके निकालने की कला जिसमें है, वो इस पार्टी का सबसे कीमती हीरा है। सरकार से लेकर समाज तक, बिना किसी लॉजिक के, लेकिन पूरे स्वैग और व्याकरण के साथ भड़ास निकालने की क्षमता रखने वाले युवाओं का यहाँ रेड कारपेट स्वागत है। पार्टी का मूल मंत्र डले रहो! जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो, अपनी जगह से न हिलना। कॉकरोच भी तब तक एक कोने में चुपचाप पड़ा रहता है जब तक कि उस पर झाड़ू न तन जाए। अगर आप भी आलस के उस शिखर पर हैं जहाँ पानी का ग्लास उठाने के लिए भी आपको मोटिवेशनल स्पीच की जरूरत पड़ती है, तो आप इस पार्टी के सबसे वफादार और अनुशासित कार्यकर्ता हैं।

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किसने बनाई सीजेपी

कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की मास्टर डिग्री कर रहे हैं। वह 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में भी वालंटियर रह चुके हैं। द हिंदू अखबार से बात करते हुए अभिजीत ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी माननीय मुख्य न्यायाधीश के उस बयान के खिलाफ युवाओं की असहमति है जिसमें उन्होंने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी करार दिया था। भारत जैसे लोकतंत्र में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। जहां संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षक माने जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई युवाओं की आलोचना कर उनका अपमान करते हैं। वो आगे कहते हैं कि अगर युवाओं को अपनी आवाज पहुंचाने के लिए कॉकरोच बनना पड़े तो हम इस पहचान को अपनाते हैं। इसीलिए हमने अपना नाम रखा है कॉकरोच जनता पार्टी। हमने आपको पहले ही बताया कि एक सिटेरिकल पॉलिटिकल पार्टी है। 

क्या है पार्टी का मिशन

पार्टी के मिशन और विज़न को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने वेबसाइट पर लिखा है कि हम यहां ना तो एक और पीएम केयर्स योजना शुरू करने आए हैं ना ही टैक्स पेयर की सैलरी पर दाबोस में छुट्टियां मनाने आए हैं। ना ही भ्रष्टाचार को रणनीतिक खर्च के तौर पर रिब्रांड करने आए हैं। हम यहां पूछने आए हैं जोर से बार-बार लिखित रूप में कि पैसा गया कहां? पार्टी की टैगलाइन है आलसी और बेरोजगारों की आवाज। पार्टी का दावा है कि वो उन लोगों को रिप्रेजेंट करती है सिस्टम जिनको गिनना भूल गया है। पार्टी एक बड़ा जिद्दी झुंड है जिसका कोई स्पॉन्सर नहीं है। बस हैं तो सिर्फ पांच चीजें जो सरकार में आने पर लागू की जाएंगी। मेनिफेस्टो में किए गए पांच वादे भी दिलचस्प हैं। वादा नंबर एक अगर सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी सरकार में आती है तो रिटायरमेंट के बाद किसी भी सीजीआई को राज्यसभा जाने का रिवॉर्ड नहीं मिलेगा। वादा नंबर दो अगर कोई वैध वोट डिलीट किया जाएगा तो चाहे उस राज्य में जहां सीजेपी की सरकार हो या विपक्ष की सीईसी को यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया जाएगा क्योंकि किसी के वोटिंग का अधिकार छीनना आतंकवाद से कम नहीं। वादा नंबर तीन महिलाओं के लिए 50% आरक्षण होगा। 33% नहीं और इसके लिए सांसदों की संख्या भी नहीं बढ़ाई जाएगी। कैबिनेट में भी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण होगा। वादा नंबर चार, बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के टीवी चैनलों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और उनके एंकर्स के बैंक अकाउंट्स की जांच होगी। वादा नंबर पांच, अगर कोई विधायक या सांसद दूसरी पार्टी में पाला बदल कर जाता है तो उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई जाएगी और उसे अगले 20 साल तक किसी भी पब्लिक ऑफिस में कोई पद नहीं दिया जाएगा। कॉकरोच जनता पार्टी बनने के दो दिन बाद 18 मई को अभिजीत ने दावा किया कि पार्टी से 500 लोग जुड़ चुके हैं। अभिजीत का कहना है कि उनकी पार्टी एक धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक और जाति विरोधी संगठन है। हमारी विचारधारा गांधी, अंबेडकर और नेहरू से प्रेरित है। अभिजीत का कहना है कि हम देश से यह वास्तविकता स्वीकार करने का आग्रह कर रहे हैं कि आज के युवा सिस्टम से अपना भरोसा खो रहे हैं क्योंकि ये अब उनकी सेवा नहीं कर रहा है।  उनकी बातें नहीं सुन रहा है। उन्हें देख भी नहीं रहा है और व्यवस्था जितनी देर तक इस बात को नजरअंदाज करती रहेगी निराशा उतनी ही बढ़ती जाएगी। अभिजीत के मुताबिक कॉकरोच बताता है कि वह हालात के हिसाब से खुद को ढाल लेता है कि देश के लोकतांत्रिक संगठनों के कामकाज को लेकर बढ़ रही फ्रस्ट्रेशन का लक्षण है।

महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने मेंबरशिप की इच्छा जताई

मामले में राजनीतिक तड़का तब लगा जब तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने भी मजाकिया अंदाज में इस पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई। महुआ मोहत्रा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि वह एंटी नेशनल पार्टी की कार्ड होल्डर सदस्य होने के साथ सीजेपी में भी शामिल होना चाहती हैं। जवाब में पार्टी ने लिखा लोकतंत्र को आप जैसे फाइटर की जरूरत है। महुआ मोहित्रा आपका स्वागत है। वहीं कीर्ति आजाद ने पूछा कि पार्टी जाइन करने की योग्यता क्या है? तो सीजेपी ने जवाब दिया 1983 वर्ल्ड कप जीतना काफी है। इन पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और मजाक की बाढ़ आ गई है। लेकिन इसी बीच पार्टी ने कुछ गंभीर मुद्दे भी उठाने शुरू कर दिए। सीजेपी ने नीट और सीबीएसई जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई। वहीं सीबीएसई रिचेकिंग फीस खत्म करने की मांग की और छात्रों से बोर्ड की गलती का फैसला वसूलने को भ्रष्टाचार बताया है। यानी व्यंग के बीच पार्टी शिक्षा, बेरोजगारी और सिस्टम की जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी हवा देने लग गई है। सबसे ज्यादा चर्चा अब सीजेपी के घोषणापत्र की हो रही है। 

पार्टी के घोषणापत्र की क्यों इतनी चर्चा

पार्टी ने पांच सूत्रिय एजेंडा जारी किया है। इसमें रिटायरमेंट के बाद जजेस को राज्यसभा सीट ना देने, संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 50% आरक्षण देने, मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और दल बदलने वाले नेताओं पर 20 साल का चुनावी प्रतिबंध लगाने जैसी मांगे शामिल कर दी है। यहां तक कि पार्टी ने कहा है कि अगर किसी वैध वोटर का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाता है तो चुनाव आयोग के अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। 

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