Prajatantra: परिवारवाद बनाम मोदी का परिवार की लड़ाई में आगे कौन, किसके दावे में कितना है दम?

By अंकित सिंह | Mar 05, 2024

"परिवारवाद की राजनीति" को बढ़ावा देने के लिए भाजपा और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार विपक्षी दलों पर निशाना साधते रहते है। नई दिल्ली लोकसभा सीट के लिए बांसुरी स्वराज की उम्मीदवारी के बाद विपक्ष को भाजपा और मोदी पर पलटवार करने का मौका मिल गया है। बांसुरी स्वराज पूर्व विदेश मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज की बेटी हैं। भाजपा ने पार्टी के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि हमारी पार्टी कैडर आधारित है जो उम्मीदवारों के चेहरे पर नहीं बल्कि कैडर की ताकत पर चुनाव लड़ती है। हालांकि, विपक्ष इसे भुनाने की कोशिश में लगा हुआ है। ये सब तब हो रहा है कि मोदी के परिवार पर लालू यादव के एक बयान में राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। 

परिवारवाद पर मोदी की परिभाषा

हाल में ही प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा था कि एक परिवार की कई पीढ़ियों के सदस्य यदि योग्यता से राजनीति में आते हैं तो वह उसे परिवारवाद नहीं मानते बल्कि एक ही परिवार द्वारा पार्टी चलाने को गलत मानते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एक परिवार के आगे कुछ नहीं दिखाई देता और इससे उसने खुद का, विपक्ष का, देश का और संसद का बड़ा नुकसान कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि देश को अच्छे, स्वस्थ विपक्ष की बहुत जरूरत है, लेकिन कांग्रेस ने दस साल के बाद भी स्वस्थ विपक्ष बनने का प्रयास नहीं किया। मोदी ने परिवारवाद को लेकर भाजपा के बयानों पर आने वाली प्रतिक्रियाओं का जवाब देते हुए कहा, ‘‘आज मैं परिवारवाद का मतलब समझा देता हूं। अगर किसी परिवार के एक से अधिक लोग जन समर्थन से अपने बलबूते राजनीतिक क्षेत्र में प्रगति करते हैं तो उसे हमने कभी परिवारवाद नहीं कहा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी पार्टी को एक ही परिवार द्वारा चलाये जाने, परिवार के लोगों को ही प्राथमिकता मिलने, परिवार के लोगों द्वारा ही सारे निर्णय लिये जाने को परिवारवाद मानते हैं।’’ मोदी ने सदन में सत्ता पक्ष की अग्रिम पंक्ति में अपने पास बैठे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘न राजनाथ जी का कोई राजनीतिक दल है, न अमित शाह का कोई राजनीतिक दल है।’’ विपक्ष पर वार करते हुए मोदी बार-बार कह रहे कि वो कहते हैं - Family First, मोदी कहता है - Nation First! उनके लिए उनका परिवार भी सबकुछ है। मेरे लिए देश का हर परिवार सबकुछ है। इन्होंने अपने परिवार के हितों के लिए देशहित को बलि चढ़ा दिया। मैंने देशहित के लिए खुद को खपा दिया है।

लालू के बयान पर सिसायी बवाल

नरेन्द्र मोदी की ओर से पूरे देश को अपना परिवार बताए जाने के कुछ देर बाद सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अध्यक्ष जे पी नड्डा सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के ‘प्रोफाइल’ पर अपने नाम के आगे ‘मोदी का परिवार’ लिखा और इस संबंध में एक अभियान शुरु कर दिया। एक दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पटना में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी पर ‘अपना परिवार’ नहीं होने को लेकर कटाक्ष किया था। इसके बाद भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन में यह अभियान चलाया। लालू ने एक रैली में कहा था, ‘‘अगर नरेन्द्र मोदी के पास अपना परिवार नहीं है तो हम क्या कर सकते हैं। वह राम मंदिर के बारे में डींगें मारते रहते हैं। वह सच्चे हिंदू भी नहीं हैं। हिंदू परंपरा में बेटे को अपने माता-पिता के निधन पर अपना सिर और दाढ़ी मुंडवानी चाहिए। जब मोदी की मां की मृत्यु हुई तो उन्होंने ऐसा नहीं किया।” 

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इंडिया गठबंधन निशाने पर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए हाल में ही कहा था कि ‘‘‘इंडिया’ गठबंधन सभी वंशवादी पार्टियों का गठबंधन है जो वंशवाद, भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण की पोषक हैं जबकि भाजपा नीत राजग सभी दलों का गठबंधन है जो राष्ट्र के सिद्धांतों पर चलता है।’’ उन्होंने इन पार्टियों को चलाने वाले परिवारों की दूसरी, तीसरी और चौथी पीढ़ी की ओर इशारा करते हुए कहा कि विपक्ष में ‘टू-जी’, ‘थ्री-जी’ और ‘फोर-जी’ पार्टियों की भरमार है। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा था कि सोनिया गांधी का लक्ष्य राहुल गांधी को पीएम बनाना है। ममता बनर्जी चाहती हैं कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी सीएम बन जाएं। लालू यादव का मकसद भी अपने बेटे को सीएम बनाना है। इसी तरह से एमके स्टालिन भी चाहते हैं कि उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के सीएम बनें। मुलायल सिंह तो अपने बेटे को सीएम बनाकर ही गए हैं। 

चुनावी नफा-नुकसान

इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा कहीं ना कहीं सीधे तौर पर परिवारवाद की राजनीति से बचती हुई दिखाई देती है। जिन बड़े नेताओं के परिवार के सदस्यों को पार्टी ने आगे बढ़ाया है, अभी कहीं ना कहीं एक दायरे तक सीमित है। दूसरी ओर विपक्ष की कई ऐसी पार्टियां हैं जो भाजपा के शब्दों में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनकर रह गई है। पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार का राज चलता रहा है। भाजपा की ओर से कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, डीएमके जैसी पार्टियों का उदाहरण के तौर पर नाम लिया जाता है। भाजपा परिवारवाद की राजनीति को भुनाकर चुनावी फायदे की लगातार उम्मीद करती रही है और उसे मिलता भी रहा है। विपक्ष अब तक भाजपा के इस आरोप पर ठोस तरीके से जवाब देने में कामयाबी हासिल नहीं कर पाया है और ना हीं विपक्ष का कोई दल इससे बचने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खड़गे को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया हो लेकिन राजनीतिक विश्लेषक आज भी दावा करते हैं कि चलता गांधी परिवार का ही है।

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