By अंकित सिंह | Aug 31, 2026
प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने भाजपा की सोशल मीडिया पर सक्रियता और राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर चर्चा की। साथ ही साथ उत्तर प्रदेश की जाट पॉलिटिक्स पर भी हमने प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे से सवाल पूछे। भाजपा में हुए बदलाव और सोशल मीडिया पर सक्रियता को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि हाल में ही देखे तो दिल्ली में जो प्रोटेस्ट हुआ, अगर वह इतना कामयाब हुआ तो उसमें सोशल मीडिया का बड़ा हाथ था। यही कारण है कि भाजपा ने भी अपने सोशल मीडिया टीम में बड़े बदलाव किए हैं और उसका असर अब हमें लगातार देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है ताकि उन्हें बताया जा सके कि मोदी सरकार में क्या काम हुए हैं और उससे पहले क्या स्थितियां थी।
नीरज दुबे ने कहा कि यह सभी को पता है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी वहां की कानून व्यवस्था है। यही कारण है कि अंकित बालियान मर्डर केस को उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को जोड़ा जा रहा है। साथ ही साथ अखिलेश यादव जाट वोटो को साधने की कोशिश कर रही कर रहे हैं। उन्हें पता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका कुछ खास जनाधार नहीं है। मुसलमान वोट उनको मिल जाएंगे लेकिन जब तक मुसलमान के साथ किसी और समुदाय का वोट उन्हें ना मिले, तब तक वह कामयाब नहीं हो सकते हैं और इसीलिए वह जाट समुदाय को साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी जाट समुदाय के बड़े नेता है और उन पर निशाना साधकर अखिलेश यादव ने बड़ी गलती कर दी थी। शायद इस वजह से अब इस मुद्दे को वह जाट समाज से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि किसी की अगर हत्या होती है वह दुखद है और सरकार आरोपियों को हर हाल में सामने लाएगी और न्याय के कटघरे में खड़ा करेगी।
राहुल गांधी के द्वारा शुद्धिकरण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी काफी दिनों के बाद यह मुद्दा उठा रहे हैं। सवाल यह भी है कि वह इतने दिनों तक क्या कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आरोप लगाना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन अगर उनके आरोप में दम है तो उनके कार्यकर्ता खुद क्यों नहीं गए एफआईआर दर्ज कराने। नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष को फिलहाल कोई बड़ा मुद्दा नहीं मिल रहा है इसलिए वह हर मामले को जाति का रंग देना चाहती है ताकि चुनाव में फायदा हो सके। उत्तर प्रदेश उत्तराखंड में चुनाव होने हैं। इसी को लेकर राहुल गांधी 2024 वाला माहौल बना रहे हैं। लेकिन इस बार वह कामयाब होंगे इसकी संभावना बेहद कम है।