By अभिनय आकाश | Sep 01, 2026
कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 3 नवंबर को सुनवाई करेगा, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले में अपने खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। ट्रायल कोर्ट ने उसे सुप्रीम कोर्ट के जज का रूप धरकर एक न्यायिक अधिकारी पर अपने पक्ष में आदेश देने का दबाव बनाने के मामले में दोषी ठहराया था। जस्टिस मधु जैन के समक्ष सुनवाई के दौरानपुलिस ने याचिका की स्वीकार्यता यानी मेंटेनेबिलिटी पर आपत्ति जताई। पुलिस का कहना था कि दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने के बाद सुकेश संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि फैसला सुनाए जाने से पहले ही, चंद्रशेखर ने ट्रायल के तरीके को लेकर आशंका जताते हुए ऊपरी अदालत का रुख किया था। इसमें 17 अगस्त, 2026 को अंतिम बहस के दौरान की गई कथित मौखिक टिप्पणियों का ज़िक्र है, जहां ट्रायल कोर्ट ने कथित तौर पर संकेत दिया था कि बचाव पक्ष की दलीलों से बरी होने का रास्ता नहीं निकलेगा। याचिका का तर्क है कि इन परिस्थितियों ने एक उचित आशंका पैदा की कि अंतिम फैसले में पूरी तरह से न्यायिक निष्पक्षता का अभाव था। याचिका में एक बड़ी शिकायत यह भी है कि फैसले में चंद्रशेखर का बार-बार "कॉनमैन" (धोखेबाज़), "सीज़न्ड कॉनमैन" (पेशेवर धोखेबाज़) और "फ्रॉडस्टर" (धोखाधड़ी करने वाला) के तौर पर वर्णन किया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि आपराधिक मामले का फैसला करने के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल ज़रूरी नहीं था और ट्रायल कोर्ट ने सबूतों से आगे बढ़कर उसके कथित व्यक्तित्व, आपराधिक प्रवृत्ति और धोखेबाज़ी के कथित करियर के बारे में व्यापक टिप्पणियां कीं।