अपना पिंड छुड़ाने के लिए अफगानिस्तान को अराजकता की भट्टी में झोंक रहा है अमेरिका

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Aug 01, 2019

एक तरफ तालिबान को पटाने के लिए अमेरिका इमरान खान को फुसलाने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ तालिबान ने अफगानिस्तान में उप-राष्ट्रपति के उम्मीदवार अमरुल्लाह सालेह पर हमला बोल दिया है। सालेह राष्ट्रपति हामिद करजई के दौर में अफगानिस्तान के गुप्तचर विभाग के मुखिया थे। कुछ वर्षों पहले वे काबुल होटल में मुझसे मिलने आए थे और मैंने उनका रवैया भारत के बारे में काफी मित्रतापूर्ण पाया था। यह अच्छा हुआ कि उनकी जान बच गई। वे घायल हुए और उनके 20 साथी मारे गए।

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यदि सत्ता उन्हें ही सौंपी जानी है तो चुनाव का ढोंग किसलिए किया जा रहा है ? अमेरिका और पाकिस्तान ने तालिबान को चुनाव लड़ने के लिए अब तक तैयार क्यों नहीं किया ? यों भी आधे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा है। यदि तालिबान सचमुच अपने पांव पर खड़े होते और लोकप्रिय होते तो उन्हें चुनाव से परहेज क्यों होता ? अमेरिका और पाकिस्तान, दोनों को यह गलतफहमी है कि तालिबान का राज होने पर अफगानिस्तान में शांति हो जाएगी। ज्यादातर तालिबान लोग गिलजई पठान हैं। उनके शीर्ष नेताओं से मेरा काबुल, कंधार, लंदन और वाशिंगटन में कई बार संपर्क रहा है। उनके सत्तारुढ़ होने पर उनकी स्वायत्ता पाकिस्तान पर बहुत भारी पड़ सकती है। वे स्वतंत्र पख्तूनिस्तान की मांग भी कर सकते हैं। इसके अलावा तालिबान के लौटने की जरा भी संभावना बनी नहीं कि काबुल, कंधार, हेरात, मज़ारे-शरीफ जैसे शहर खाली हो जाएंगे। अमेरिका अपना पिंड छुड़ाने के लिए अफगानिस्तान को अराजकता की भट्टी में झोंकने पर उतावला हो रहा है।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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