Hindu Mythology: 'कृष्ण-कृष्ण' और 'शिव-शिव' का जाप क्यों है वर्जित? जानें इसके पीछे का धार्मिक और Astrological Reason

By अनन्या मिश्रा | Mar 20, 2026

हिंदू धर्म में नाम जाप का अधिक महत्व होता है। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति पूजा-पाठ या हवन आदि नहीं कर सकता है या फिर उसने कोई पुण्य कर्म नहीं किए हैं। तो सिर्फ नाम जाप करने से जातक को पूजा-पाठ और पुण्य कर्मों का फल कई अधिक गुना मिलता है। नाम जप भगवान की भक्ति का सबसे सरल तरीका माना जाता है। यही वजह है कि अक्सर अभिवादन के समय लोग देवी-देवताओं का नाम लेते हैं। जैसे- राम-राम, राधे-राधे, जय श्रीकृष्ण या फिर हर-हर महादेव। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जैसे राम-राम या राधे-राधे बोला जाता है, ठीक उसी तरह शिव-शिव क्यों नहीं कहा जाता है।

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श्रीकृष्ण ने न सिर्फ ऐसा वरदान राधा रानी को दिया था, बल्कि वह स्वयं अपना नाम राधा रानी के साथ जोड़ते थे। इसलिए कहा जाता है कि कृष्ण को बुलाना है तो राधा रानी का नाम उनके नाम के साथ लिया जाना चाहिए।

धार्मिक शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि श्रीकृष्ण की कृपा किसी भी व्यक्ति को तभी प्राप्त होती है, जब व्यक्ति पर श्रीराधा की कृपा होती है। इसलिए श्रीराधा का नाम कृष्ण के नाम से पहले लिया जाता है।

वहीं शिव-शिव इसलिए नहीं कहा जाता है, क्योंकि भगवान शिव स्वयं में पूर्ण हैं। वह बैरागी भी हैं और गृहस्थी भी हैं। वहीं इसके पीछे अंक ज्योतिष का भी योगदान है। 'श' अक्षर का अंक 30 है और 'व' का अंक 29 है।

अगर 30 और 29 को जोड़ा जाए, तो मूल अंक 59 आएगा। अगर 59 को जोड़ा जाए, तो मूल अंक 14 आएगा और इसको जोड़कर आखिरी अंक 5 रह जाएगा। 5 अंक पंच तत्व और भूतों का प्रतीक है।

ऐसे में जब हम शिव-शिव कहते हैं, तो पंच तत्वों और पंच भूतों की ऊर्जा हमारी ओर आकर्षित होती है। क्योंकि मनुष्य खुद पंच तत्व से बना है तो यह ऊर्जा सहन कर लेते हैं। लेकिन पंच भूतों की ऊर्जा व्यक्ति को हानि पहुंचा सकती है।

इसलिए शिव-शिव नहीं बोला जाता है। इसके बदले हर-हर महादेव कहा जाता है। या फिर भगवान शिव का पंचाक्षर मंत्र 'ऊँ नम: शिवाय' बोला जाता है।

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