यूपी में बीजेपी क्यों हारी? पीएम मोदी को सौंपी गई 15 पेज की रिपोर्ट, अग्निपथ, पेपर लीक, कार्यकर्ताओं की नाराजगी का जिक्र

By अंकित सिंह | Jul 18, 2024

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद भाजपा में खूब उठापटक देखने को मिल रही है। इलके साथ ही लखनऊ से दिल्ली तक बैठकों का दौर भी देखा जा रहा है। खराब प्रर्दशन को लेकर लगातार मंथन किया जा रहा है। इन सब के बीच पार्टी की एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें दावा किया गया है कि सरकार के प्रति पार्टी कार्यकर्ताओं का असंतोष, अग्निपथ योजना के प्रति गुस्सा, राजपूत समुदाय की नाराजगी कुछ ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से राज्य में पार्टी की लोकसभा चुनाव में हार हुई। 

जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने रिपोर्ट में खराब नतीजों के लिए बताए गए कारणों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि चौधरी ने निराशाजनक प्रदर्शन के कारणों को विस्तार से बताया। भाजपा ने यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सिर्फ 33 सीटें जीतीं, जो कि 2019 और 2014 की संख्या से काफी कम है। सामूहिक रूप से, विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने 43 सीटें जीतीं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के सभी छह क्षेत्रों - पश्चिमी यूपी, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर और काशी क्षेत्र में भाजपा के वोट शेयर में कम से कम 8 प्रतिशत की कमी आई है। पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन पश्चिम और काशी क्षेत्र में रहा, जहां उसे 28 में से केवल आठ सीटें मिलीं। ब्रज में उसे 13 में से 8 सीटें मिलीं। गोरखपुर में पार्टी को 13 में से सिर्फ छह सीटें मिलीं, जबकि अवध में 16 में से सिर्फ 7 सीटें मिलीं। कानपुर-बुंदेलखंड में, भाजपा अपनी मौजूदा सीटों को फिर से हासिल करने में विफल रही, 10 में से केवल 4 सीटें जीत पाई।

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इंडिया टूडे के मुताबिक रिपोर्ट की बड़ी बातें

- राज्य में अधिकारियों एवं प्रशासन की मनमानी एवं निरंकुशता।

- पार्टी कार्यकर्ताओं में सरकार के प्रति नाराजगी।

- पिछले 6 सालों से लगातार सरकारी नौकरियों में पेपर लीक हो रहे हैं।

- राज्य सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में संविदा कर्मियों की भर्ती में सामान्य वर्ग के लोगों को प्राथमिकता दिये जाने से विपक्ष के आरक्षण खत्म करने के मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है।

- राजपूत समाज की पार्टी से नाराजगी।

- संविधान बदलने पर पार्टी नेताओं ने दिए बयान।

- जल्दी टिकट वितरण के कारण छठे और सातवें चरण के मतदान तक कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हो गया।

- पुरानी पेंशन का मुद्दा सरकारी अधिकारियों के बीच गूंजा।

- सेना के जवानों के लिए अग्निपथ भर्ती योजना एक बड़ा मुद्दा बन गई।

- बीजेपी के कोर वोटरों के नाम निचले स्तर के चुनाव अधिकारियों ने वोटर लिस्ट से हटा दिये. लगभग सभी सीटों पर पार्टी के मूल मतदाताओं के 30,000-40,000 नाम हटा दिए गए। 

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