Prabhasakshi Exclusive: Iran ने Trump से क्यों कहा- बेटा जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते?

By नीरज कुमार दुबे | Apr 02, 2025

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बमबारी की धमकी दी तो तेहरान ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। क्या दोनों के बीच सीधी भिड़ंत हो सकती है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने नाराजगी जताई है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की अमेरिकी मांगें नहीं मानता है तो उस पर बमबारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर ईरान “कोई समझौता नहीं करता है, तो बमबारी की जाएगी। यह ऐसी बमबारी होगी, जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होगी।” उन्होंने कहा कि ट्रंप की यह ताजा धमकी, जो पहले दी गई किसी भी धमकी से कहीं अधिक स्पष्ट और हिंसक है, तब आई जब उन्होंने ईरान को एक पत्र भेजा, जिसका अभी तक खुलासा नहीं किया गया है, जिसमें उन्होंने अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान ने अमेरिका को एक जवाब भेजा था, जिसमें कहा गया था कि वह अप्रत्यक्ष बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने ट्रंप की धमकी के बारे में कहा, “किसी देश के प्रमुख द्वारा ईरान पर बमबारी करने की स्पष्ट धमकी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के सार के लिए स्पष्ट विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कहा है कि इस तरह की धमकी संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन है और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि ईरान ने भी पलटवार में कहा है कि हिंसा आखिर हिंसा ही लाती है।

इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi Exclusive: Trump कह रहे हैं Ceasefire करो मगर Putin अपनी सेना में सबसे बड़ा भर्ती अभियान चला रहे हैं, अब Ukraine का क्या होगा?

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वार्ता का प्रस्ताव करते हुए अपना मूल पत्र संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ राजनयिक दूत अनवर गरगाश के माध्यम से भेजा था। उन्होंने कहा कि मध्यस्थ के रूप में गरगाश को चुनने को इस बात के संकेत के रूप में देखा गया कि पत्र का उद्देश्य वार्ता को एक वास्तविक मौका देना था। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने प्रगति के लिए मध्य मई की समयसीमा तय की है, लेकिन अगस्त के मध्य की एक लंबी समयसीमा भी है, जिसके बाद मूल 2015 परमाणु समझौता काफी हद तक समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को उस समझौते से बाहर कर दिया था हालांकि इस कदम को व्यापक रूप से एक गलती के रूप में देखा गया क्योंकि इसने ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को गति देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि साथ ही इस मामले में एक पहलू यह भी है कि ईरान ने यूएई की बजाय अपने पारंपरिक चुने हुए मध्यस्थ ओमान के माध्यम से अपना उत्तर भेजा। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि ईरान नहीं चाहता कि यूएई, जिसने इज़राइल के साथ संबंधों को सामान्य कर लिया है वह मध्यस्थ के रूप में कार्य करे।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा तेहरान ने इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की है कि ईरान से समझौते की मांग वाले ट्रंप के पत्र में क्या-क्या मांगें की गयी थीं। उन्होंने कहा कि लेकिन इराक में ईरानी राजदूत मोहम्मद काज़म अल-सादघ ने संकेत दिया है कि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम से कहीं अधिक व्यापक वार्ता चाहता है। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि पत्र में ईरान समर्थित इराकी पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स मिलिशिया को भंग करने की मांग भी की गयी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा यह भी चर्चा है कि अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विभाजित है कि क्या ईरान से केवल यह मांग की जाए कि वह अपने असैन्य परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के लिए खोले, या फिर यह मांग की जाये कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से समाप्त करे या फिर यह मांग की जाये कि मध्य पूर्व में गाजा में हमास और यमन में हौथियों जैसे प्रतिरोध समूहों को वित्तपोषित करने की प्रतिबद्धता से ईरान पीछे हटे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को “पूरी तरह से खत्म” करने का आह्वान किया है, जिसे तेहरान ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को प्रतिबंधित करने की बात कही है जिसे ईरान 2015 से ही स्वीकार करने को तैयार है, बशर्ते कि इससे ईरानी अर्थव्यवस्था पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाए।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इस तरह दोनों देशों के बीच भले ही सीधे तौर पर नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर भी जो कूटनीति चल रही है वह किसी भी हमले की संभावना को कम कर रही है। उन्होंने कहा कि संभव है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर चुका हो ऐसे में उस पर किया गया कोई हमला एक और विश्व युद्ध करवा सकता है।

प्रमुख खबरें

Ek Din Ki Mehfill में छलके Aamir Khan के आँसू, बेटे Junaid Khan और Sai Pallavi ने संभाला, वीडियो वायरल

Prabhasakshi NewsRoom: न्यायाधीश के खिलाफ सत्याग्रह न्यायिक तंत्र को बदनाम करने की साजिश लगती है

School Summer Vacation 2026 | अप्रैल में जानलेवा लू चल रही... क्या भारत को स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियों के समय पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है?

Ank Jyotish Prediction: मूलांक 3, 5, 8, और 9 वालों की चमकेगी किस्मत, Career में मिलेगी बंपर सफलता