राष्ट्र बड़ा या धर्म? सांसद मियां अल्ताफ अहमद ने देश सेवा पर उर्स की तैयारियों को तवज्जो क्यों दी?

By नीरज कुमार दुबे | May 24, 2025

भारत ने दुनिया के 33 देशों में अपने सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों को भेजा है ताकि पाकिस्तानी आतंक की वीभत्सता से सभी को परिचित कराया जा सके। इस समय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में वहां की सरकारों और प्रमुख लोगों को पाकिस्तानी आतंकवाद और भारत के आत्मरक्षा के अधिकार के बारे में जानकारी दे रहे हैं और उन देशों का समर्थन हासिल कर रहे हैं। देखा जाये तो इस समय सभी राजनीतिक दलों के बीच जो एकता नजर आ रही है उसी के चलते हम दुनिया के सामने मजबूती से अपना पक्ष रख पा रहे हैं। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में शामिल सांसद देश की सेवा के लिए यह अवसर प्रदान करने के लिए मोदी सरकार का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।

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हम आपको बता दें कि जिन सांसद महोदय ने प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने से इंकार किया वह हैं जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अनंतनाग-राजौरी से सांसद मियां अल्ताफ अहमद। उन्होंने सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल से खुद को अलग कर लिया है, जो वर्तमान में पांच देशों के दौरे पर है। सांसद अल्ताफ अहमद को डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंड में शामिल होना था। वर्तमान में यह प्रतिनिधिमंडल रूस में है और वहां से यह स्लोवेनिया, ग्रीस, लातविया और स्पेन जायेगा। 

हम आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ एनसी नेता और प्रभावशाली धार्मिक व्यक्तित्व मियां अल्ताफ ने इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होने का कारण पूर्व निर्धारित प्रतिबद्धताओं को बताया है। उन्होंने कहा है कि हर वर्ष जून के पहले सप्ताह में गांदरबल जिले के कंगन स्थित वांगथ में मनाए जाने वाले उर्स के मद्देनज़र मैं प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं हो पाऊंगा। हम आपको बता दें कि मियां अल्ताफ अहमद बाबा जी साहिब लारवी वांगथ की दरगाह के सज्जादा नशीन (धार्मिक संरक्षक) भी हैं, जहां हर साल उर्स के दौरान हज़ारों श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने कहा है कि हां, मेरी पार्टी ने मेरा नाम प्रतिनिधिमंडल के लिए भेजा था, लेकिन आगामी उर्स से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियों के कारण मैं इस दौरे में शामिल नहीं हो पा रहा हूं। उन्होंने कहा है कि विदेश मंत्रालय और उनकी पार्टी को इस बारे में सूचित कर दिया गया है और उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

बहरहाल, यहां सवाल उठता है कि मियां अल्ताफ अहमद ने राष्ट्र हित से ज्यादा उर्स को महत्व क्यों दिया? उर्स तो हर वर्ष लगता है लेकिन देश ने सेवा के लिए अल्ताफ अहमद को इस समय पुकारा था। सवाल उठता है कि क्या राष्ट्र से ज्यादा धर्म को तवज्जो देने वाले लोगों को राजनीति में होना चाहिए? सवाल उठता है कि क्या राष्ट्र सुरक्षा से ज्यादा धार्मिक मेले की तैयारियों को तवज्जो देने वाले व्यक्ति को जनप्रतिनिधि के रूप में चुना जाना चाहिए? सवाल यह भी उठता है कि जिस कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ क्या वहां के सांसद को विदेशों में जाकर इस निर्मम हत्याकांड के मुद्दे पर पाकिस्तान को आड़े हाथ नहीं लेना चाहिए था?

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