WFH, Oil Crisis की अपील...PM मोदी से क्यों भिड़े राहुल गांधी?

By अभिनय आकाश | May 11, 2026

हमें पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करना होगा। शहरों में जहां मेट्रो है वहां हम तय करें कि हम मेट्रो का ही उपयोग करेंगे। हमने कोरोना के समय में वर्क फ्रॉम होम की ऑनलाइन मीटिंग्स की। वीडियो कांफ्रेंस की ऐसी अनेक व्यवस्थाएं विकसित की और हमें आदत भी हो गई थी। आज समय की मांग ऐसी है कि उन व्यवस्थाओं को हम फिर से शुरू करें तो वह देश हित में होगा। साथियों हमें विदेशी मुद्रा बचाने के जो भी रास्ते हम लोग अपना सकते हैं। हमें बचाना होगा। यह है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन्होंने पूरे देशवासियों से बहुत बड़ी अपील की है और प्रधानमंत्री मोदी की यह अपील सामने आ रही है मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका ईरान के युद्ध की वजह से कैसे इस युद्ध के तनाव के बीच और संकट की घड़ी में देशवासी अपना योगदान देकर देश की मदद कर सकते हैं। दरअसल तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध और सप्लाई चेन के संकट से गुजर रही है जिसका असर पूरी दुनिया पर हो रहा है और भारत पर भी इसका बुरा असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में देश को मुश्किल से बचाने के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और प्रधानमंत्री मोदी ने इसी पर बात करते हुए अपना संदेश दिया जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से कहा है कि जहां तक संभव हो सके पेट्रोल डीजल की बचत करें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोरोना काल में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम किया था। ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को अपनाया था और अब एक बार वापस से जरूरत पड़ने पर ऐसी ही प्राथमिकताओं को नागरिकों को देनी चाहिए। पीएम मोदी ने ऐसी अपील की है। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए भी कई सारी बातें कही जिसमें उन्होंने जनता से अपील की है कि वह सोना कम खरीदें और साथ ही में विदेशी डेस्टिनेशंस पर कम घूमने का प्लान बनाएं और भारत के भीतर ही कहीं घूमने जाएं। आप खुद सुनिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कुछ अपील की है देशवासियों से। साथियों हमें विदेशी मुद्रा बचाने के जो भी रास्ते हम लोग अपना सकते हैं हमें बचाना होगा। साथियों गोल्ड यानी सोने की खरीद एक और पहलू है जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत अधिक खर्च होती है। एक जमाना था जब संकट आता था, कोई युद्ध होता था तो लोग देश हित में सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है। लेकिन देश हित में हमको यह तय करना पड़ेगा कि साल भर तक घर में कोई भी फंक्शन हो, कोई भी कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। सोना नहीं खरीदेंगे। हमने कोरोना के समय में वर्क फ्रॉम होम की, ऑनलाइन मीटिंग्स की, वीडियो कॉन्फ्रेंस की, ऐसी अनेक व्यवस्थाएं विकसित की और हमें आदत भी हो गई थी। आज समय की मांग ऐसी है कि उन व्यवस्थाओं को हम फिर से शुरू करें तो वह देश हित में होगा। हमें पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करना होगा। शहरों में जहां मेट्रो है वहां हम तय करें कि हम मेट्रो का ही उपयोग करेंगे।

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अखिलेश ने लिखा कि  चुनाव खत्म होते ही संकट याद आ गया। दरअसल देश के लिए संकट सिर्फ एक है और उसका नाम है भाजपा। इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ी तो 5 मिलियन डॉलर की जो जुमले वाली अर्थव्यवस्था है वह कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह से छूट गई है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पाताल में जा रहा है। इसके आगे वो लिखते हैं सोना ना खरीदने की अपील जनता से नहीं भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं खरीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई से स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। यानी गोल्ड खरीदने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक पता कर लीजिए या अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी तक। वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आई हैं? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं करी थी। क्या वो विमान सारे पानी से उड़ रहे थे? क्या वो होटलों में नहीं ठहरे थे?

मोदी ने लोगों से घर से काम करने का आग्रह क्यों किया?

मोदी ने कहा कि ईंधन की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए देश को कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई आदतों को पुनर्जीवित करना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के दौरान हमने घर से काम करना, वर्चुअल मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कई अन्य तरीके विकसित किए। हम इनके आदी हो गए। अब समय की मांग है कि हम इन तरीकों को फिर से शुरू करें। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे जहां भी संभव हो, मेट्रो रेल सेवाओं, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करके पेट्रोल और डीजल का कम से कम इस्तेमाल करें। प्रधानमंत्री ने ईंधन की अधिक खपत करने वाले सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने के लिए माल परिवहन को रेलवे पर स्थानांतरित करने का भी आह्वान किया। सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में पश्चिम एशिया संघर्ष बढ़ने के बाद से भारत पर ईंधन आयात का बोझ तेजी से बढ़ा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार व्यवधान से तेल की कीमतें कई महीनों तक ऊंची बनी रह सकती हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में वृद्धि से बचाने के लिए भारी नुकसान उठा रही हैं।

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