Ganga ki Katha: गंगा ने नदी में क्यों बहाए थे अपने 7 पुत्र, महाभारत के इस महान योद्धा से जुड़ी है कथा

By अनन्या मिश्रा | Jan 09, 2025

महाभारत के सबसे प्रमुख पात्रों में से एक भीष्म पितामह थे। वह महाराज शांतनु और देवी गंगा के पुत्र थे। भीष्म पितामह को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त हुआ था। जन्म के बाद उनका नाम देवव्रत रखा गया था। लेकिन जीवन भर विवाह न करने की प्रतिज्ञा की वजह से उनका नाम भीष्म पड़ गया। वह एक श्राप के कारण वह लंबे समय तक पृथ्वी पर रहे और अंत समय में उनको असहनीय कष्ट का सामना करना पड़ा था।

शांतनु ने तोड़ा था वचन

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मुक्त क्यों नहीं हो पाया 8वां पुत्र

पौराणिक कथा के मुताबिक गंगा के 8 पुत्र पिछले जन्म में 8 वसु अवतार थे। जिनमें से द्यु नामक एक वसु ने अन्य के साथ मिलकर ऋषि वशिष्ठ की कामधेनु गाय को चुरा लिया था। इस बात का पता जब ऋषि को पता चली, तो वह बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने गुस्से में आकर सभी को यह श्राप दिया कि वह सभी मृत्युलोक में मानव रूप में जन्म लेंगे। साथ ही इन सभी को कई तरह के कष्टों का सामना करना होगा।

ऐसे में उन सभी को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने ऋषि वशिष्ठ से क्षमायाचना की। तब ऋषि वशिष्ठ ने कहा कि सातों वसु को मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन द्यु को अपनी सजा का फल भोगना पड़ेगा। यही वजह है कि गंगा के 8वें पुत्र अर्थात भीष्म पितामह को इस श्राप से मुक्ति नहीं मिल सकी।

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