Astrology Tips: सूर्य को अर्घ्य देते समय क्यों जरूरी है गंगाजल-गुड़, जानें इसका Powerful Astro-Reason

By अनन्या मिश्रा | Mar 19, 2026

भारतीय संस्कृति में सूर्य देव की पूजा-उपासना का विशेष महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष के मुताबिक सूर्य हमारे जीवन का आधार है। यह स्वास्थ्य, ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता के प्रतीक माने जाते हैं। सूर्य देव को अर्घ्य देना सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह जीवन में मानसिक शक्ति, सकारात्मकता और आत्मबल बढ़ाने का शक्तिशाली उपाय है। ज्यादातर महिलाएं सुबह के समय सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपने दिन की शुरूआत करती हैं।

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जानिए गंगाजल और गुड़ का महत्व

शुद्धता का प्रतीक है गंगाजल

गंगाजल अपने आप में शुद्ध और दिव्य माना जाता है। यह निगेटिव एनर्जी को दूर करता है और शरीर व मन को पवित्र बनाता है। सूर्य देव की किरणों के साथ इनके संपर्क में जातक में ऊर्जा और तेज बढ़ता है।

मधुरता और सौम्यता का प्रतीक है गुड़

ज्योतिष शास्त्र में गुड़ का संबंध सूर्य और शुक्र ग्रह से माना जाता है। गुड़ सूर्य की ऊर्जा को संतुलित करता है और जीवन में मिठास और स्थिरता लाता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से गंगाजल और गुड़ के लाभ

सूर्य ऊर्जा का शुद्धिकरण

अगर जातक की कुंडली में सूर्य कमजोर या पाप ग्रहों से प्रभावित होता है, तो इससे जातक का आत्मविश्वास कम हो जाता है। गंगाजल में गुड़ मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से सूर्य की ऊर्जा शुद्ध होती है और जातक की मनोबल बढ़ता है।

आत्मविश्वास और सम्मान में बढ़ोत्तरी

सूर्य सम्मान और नेतृत्व का ग्रह माना जाता है। सूर्य देव को नियमित रूप से अर्घ्य देने से जातक के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। यह उपाय उन महिलाओं के लिए लाभकारी होता है, जो सरकारी नौकरी या नेतृत्व से जुड़ी हैं।

पितृ दोष

सूर्य देव हमारे पितरों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। गंगाजल में गुड़ मिलाकर अर्घ्य देने से पितृदोष शांत होता है। साथ ही जातक को पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सेहत संबंधी लाभ

गुड़ में लौह तत्व पाए जाते हैं और यह शरीर के लिए ऊर्जा का स्त्रोत है। सूर्य देव को अर्घ्य देने से जातक के शरीर में जीवन शक्ति और संतुलन बढ़ता है। आंखों, दिल और ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधार होता है।

जानिए अर्घ्य देने की विधि

सुबह जल्दी सूर्योदय से पहले स्नान आदि कर लें।

फिर तांबे के लोटे में गंगाजल मिलाएं और थोड़ा सा गुड़ मिलाएं।

अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।

दोनों हाथों से लोटा उठाते हुए 'ऊँ घृणि सूर्याय नम:' मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें।

सूर्य देव को अर्घ्य देने समय मन में शांति और आभार का भाव रखें।

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