Prabhasakshi Exclusive: Russia ने Trump के Ukraine Truce Plan को क्यों खारिज किया? ट्रंप की किस शर्त से नाराज हो गये Putin?

By नीरज कुमार दुबे | Jan 02, 2025

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि रूस ने यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के संबंध में डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। क्या थे वह प्रस्ताव और क्यों इन्हें खारिज किया गया? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि रूसी मीडिया के अनुसार, रूस ने युद्धविराम के बदले कीव की नाटो सदस्यता को स्थगित करके रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप की टीम द्वारा पेश की गई योजना को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि साथ ही ट्रंप की ओर से पद संभालने पर एक दिन के भीतर युद्ध समाप्त करने के वादे ने नाटो सहयोगियों के बीच उन समझौतों के बारे में चिंता पैदा कर दी है जो वह यूक्रेन के लिए करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टीम द्वारा युद्धविराम के लिए जो प्रस्ताव भेजा गया था उसमें रूस को अपनी शर्तों पर युद्ध की समाप्ति की गारंटी दी गई थी। उन्होंने कहा कि ट्रंप अपनी योजना के बारे में ज्यादा खुलासा शायद इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि यदि उन्होंने अभी सारे प्रस्ताव सार्वजनिक कर दिये तो सत्ता में आने पर वह क्या प्रस्ताव पेश कर पाएंगे।


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि नवंबर महीने में वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ट्रंप के तीन करीबी स्रोतों का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी थी कि यूक्रेन में संघर्ष विराम की योजनाओं में कीव की नाटो सदस्यता में 20 साल की देरी शामिल है। ट्रंप के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सितंबर में प्रसारित शॉन रयान शो के लिए एक साक्षात्कार में ट्रंप की योजना के संभावित विवरण का खुलासा किया था। वेंस ने कहा था कि रूस और यूक्रेन के बीच सीमांकन की वर्तमान रेखा एक "विसैन्यीकृत क्षेत्र" बन जाएगी, जिसे मजबूत किया जाएगा ताकि रूस फिर से आक्रमण न कर सके। उन्होंने कहा कि रिपोर्टों में बताया गया था कि यह विसैन्यीकृत क्षेत्र लगभग 1,290 किमी (800 मील) तक फैला होगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि क्षेत्र की रक्षा कौन करेगा? उन्होंने कहा कि वेंस ने यह भी सुझाव दिया था कि योजना के तहत, यूक्रेन को अपने कब्जे वाले कुछ क्षेत्रों को रूस को सौंपना होगा, जिसमें लुहान्स्क, डोनेट्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज़िया के कुछ हिस्से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रूस ने 2014 के बाद से यूक्रेन के करीब 20 फीसदी इलाके पर कब्जा कर लिया है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा, 27 नवंबर को ट्रंप ने सेवानिवृत्त जनरल कीथ केलॉग को रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए अपना विशेष दूत नामित किया था। अप्रैल में, केलॉग ने एक रणनीति पत्र का सह-लेखन किया था जिसमें सुझाव दिया गया कि अमेरिका यूक्रेन को हथियार देना जारी रख सकता है, बशर्ते कि कीव मास्को के साथ शांति वार्ता में भाग लेने के लिए सहमत हो। उन्होंने कहा कि केलॉग के पेपर ने अतिरिक्त रूप से सुझाव दिया कि नाटो यूक्रेन की सदस्यता को रोक सकता है और रूस को शांति वार्ता में भागीदारी के बदले में कुछ प्रतिबंधों से राहत की पेशकश की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने पिछले महीने रूसी क्षेत्र में मिसाइलें लॉन्च करने के लिए यूक्रेन की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 26 दिसंबर को अपनी वार्षिक प्रेस वार्ता में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस विचार को खारिज कर दिया था कि नाटो में यूक्रेन की सदस्यता को स्थगित करना मॉस्को के लिए काफी संतोषजनक होगा। उन्होंने कहा कि पुतिन ने कहा था कि हालांकि उन्हें ट्रंप की योजना के बारे में विशेष जानकारी नहीं है, लेकिन वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने 2021 में यूक्रेन के नाटो में प्रवेश को 10 से 15 साल के लिए टालने के लिए इसी तरह का सुझाव दिया था।


ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि फिलहाल तो रूस ने ट्रंप के दो विचारों को पूरी तरह खारिज करते हुए अमेरिका को स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध पर न तो किसी तरह का समझौता किया जायेगा और न ही यूक्रेन में बाहरी देशों की सेना का आना मंजूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रूस ने यूक्रेन पर कब्जे की जंग को और तेज कर दिया है। देखना होगा कि ट्रंप जब 20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालेंगे तो स्थितियां क्या नया मोड़ लेती हैं।

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