सोना खरीदने से क्यों मना कर रहे हैं मोदी? क्या फिर से होने वाला है Work From Home? पेट्रोल-डीजल के दाम कबसे बढ़ेंगे?

By नीरज कुमार दुबे | May 11, 2026

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका ईरान तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही तेजी, रुपये पर बढ़ता दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर गहराती चिंता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से बचत करने की अपील की है। हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने, विदेश यात्राएं टालने और जहां संभव हो वहां घर से काम करने जैसे उपाय अपनाने का आग्रह किया।

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भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। रुपये में कमजोरी आई है और आयात बिल लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल के दौरान देश ने घर से काम, वर्चुअल बैठकों और वीडियो संवाद जैसी व्यवस्थाओं को अपनाया था। अब समय आ गया है कि इन तरीकों को फिर से व्यापक रूप से अपनाया जाए ताकि ईंधन की खपत कम हो और विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।

उन्होंने लोगों से मेट्रो रेल का अधिक उपयोग करने, कार पूल जैसी शेयरिंग व्यवस्था अपनाने और बिजली से चलने वाले वाहनों को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही माल परिवहन को सड़कों की बजाय रेलमार्ग की ओर ले जाने की बात भी कही ताकि डीजल पर निर्भरता घटाई जा सके। हम आपको बता दें कि पश्चिम एशिया संकट के बाद भारत का ईंधन आयात खर्च तेजी से बढ़ा है और यदि होरमुज जलडमरूमध्य में बाधा लंबे समय तक बनी रही तो तेल की ऊंची कीमतें कई महीनों तक बनी रह सकती हैं।

प्रधानमंत्री की सबसे अधिक चर्चा में रही अपील सोने की खरीद को लेकर थी। उन्होंने कहा कि देशहित में नागरिकों को कम से कम एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचना चाहिए। हम आपको बता दें कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में शामिल है और विवाह तथा त्योहारों के मौसम में इसकी मांग बहुत बढ़ जाती है। चूंकि सोना मुख्य रूप से विदेशों से आयात किया जाता है, इसलिए इसकी अधिक खरीद से डॉलर बाहर भेजना पड़ता है और भारत के घरेलू विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत के लिए कच्चे तेल और सोने में एक समानता है। दोनों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदा जाता है और भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। जब तेल महंगा होता है और साथ ही सोने की मांग भी बढ़ जाती है, तब देश को आयात के लिए अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ता है और रुपये पर दबाव आता है। यही कारण है कि आर्थिक संकट के समय सरकारें अक्सर सोने के आयात को नियंत्रित करने के उपाय करती रही हैं। अतीत में भी आयात शुल्क बढ़ाने, आयात पर रोक लगाने और वैकल्पिक योजनाओं को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राएं, विदेशी पर्यटन और विदेशों में आयोजित होने वाले विवाह समारोह भी एक वर्ष तक टालने का आग्रह किया। उनका कहना था कि मध्यम वर्ग में विदेश घूमने और विदेश में विवाह करने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन मौजूदा वैश्विक संकट के समय विदेशी मुद्रा बचाना राष्ट्रीय आवश्यकता बन गया है।

इस बीच, अमेरिका ईरान युद्ध का असर वैश्विक सोना बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। आम तौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के समय निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, जिससे इसकी कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार स्थिति जटिल है क्योंकि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका बढ़ गई है। ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशक सोने की बजाय ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसी कारण युद्ध की अनिश्चितता के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

हम आपको यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री ने केवल ईंधन और सोने तक ही अपनी अपील सीमित नहीं रखी। उन्होंने खाद्य तेल की खपत घटाने, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने और प्राकृतिक खेती तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की भी बात कही। उनका कहना था कि किसी भी तरह विदेशी मुद्रा की बचत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और देश को आत्मनिर्भर बनाने में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।

हालांकि विपक्ष ने प्रधानमंत्री की इस अपील पर सवाल भी उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है और अब आम लोगों पर बोझ डाल रही है। दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री की अपील को दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि इससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकेगा।

उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का संदेश केवल सोना या ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश को संभावित वैश्विक आर्थिक संकट के लिए तैयार करने का संकेत भी है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं और सोने का आयात भी बढ़ता रहा, तो महंगाई, आयात बिल और रुपये पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार नागरिकों से संयम, बचत और स्वदेशी सोच अपनाने की अपील कर रही है ताकि वैश्विक संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता बनी रहे।

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