G20 में Modi-Biden ने मिलकर China को घेर लिया, Jinping की हर चाल का Bharat दे रहा मुँहतोड़ जवाब

By नीरज कुमार दुबे | Sep 10, 2023

इटली ने चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बीआरआई से हटने की घोषणा क्या की, चीनी नेतृत्व के हाथ-पांव फूल गये क्योंकि इस परियोजना पर चीन अब तक अरबों डॉलर लगा चुका है। यही नहीं, चीन की सांस तब और उखड़ने लग गयी जब उसे यह पता चला कि इटली उसका साथ छोड़ कर भारत के साथ चला गया है। हम आपको बता दें कि भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर बनाये जाने की जो घोषणा की गयी है उसमें इटली भी शामिल है। इस कॉरिडोर का ऐलान होने से भी चीन परेशान हो गया है। उसे समझ नहीं आ रहा है कि करे तो क्या करे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जी20 सम्मेलन में खुद आने की बजाय अपने प्रधानमंत्री ली क्विंग को भेज दिया। ली क्विंग चूंकि वैश्विक मुद्दों का सामना करने के मामले में नये हैं इसलिए वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने जी20 से इतर इटली की प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उन्हें समझाने की कोशिश की। लेकिन एक तरफ जैसे ही चीनी प्रधानमंत्री ने इतालवी प्रधानमंत्री से मुलाकात की तो भारत ने भी मौका नहीं गंवाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इतालवी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-पश्चिम एशिया और यूरोप कॉरिडोर के ऐलान के समय चीन को इशारों इशारों में चेतावनी दे डाली है कि ऐसे प्रोजेक्टों पर काम करते समय दूसरे देशों की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। यही नहीं, चीन की परेशानी बढ़ाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि शी जिनपिंग के नहीं आने का कोई फर्क नहीं पड़ा और शिखर सम्मेलन अच्छे से चल रहा है।


जहां तक चीनी और इतालवी प्रधानमंत्री की मुलाकात की बात है तो आपको बता दें कि चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग ने शनिवार को जी20 शिखर सम्मेलन से इतर अपनी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से हटने की इटली की योजना के बीच दोनों की मुलाकात हुई है। इटली का मानना है कि परियोजना “अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाई है।” मेलोनी ने नयी दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के जगह शामिल हुए ली से मुलाकात के दौरान अपने देश में निवेश और व्यापार करने के लिए "निष्पक्ष, न्यायसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल" प्रदान करने का वादा किया। जी-20 शिखर सम्मेलन के मौके पर ली-मेलोनी की बैठक इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि इतालवी सरकार ने खुले तौर पर बीआरआई से हटने की इच्छा व्यक्त की है। इटली ने कहा है कि चीन की अरबों डॉलर की बुनियादी ढांचा परियोजना से उसे कोई लाभ नहीं हुआ है।

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दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी शनिवार को अपनी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें उन्होंने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा साझेदारी में शामिल होने के लिए इटली की सराहना की। आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की जी20 अध्यक्षता के लिए इटली के समर्थन की भी सराहना की। बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत और इटली के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति का भी जायजा लिया और रक्षा एवं नयी उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने व्यापक वैश्विक भलाई के लिए जी7 और जी20 के मिलकर काम करने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री मेलोनी ने जी20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए मोदी को बधाई दी।


प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा है, ‘‘प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ मेरी बैठक उत्कृष्ट रही। हमारी बातचीत में व्यापार, वाणिज्य, रक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और अन्य क्षेत्रों पर चर्चा हुई। भारत और इटली वैश्विक समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।’’ हम आपको बता दें कि इस साल मार्च में अपनी राजकीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मेलोनी की यह दूसरी भारत यात्रा है। पिछली यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था। मोदी जी20 शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और मॉरीशस के नेताओं से बातचीत की थी। शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन और जापान समेत कई अन्य देशों के नेताओं से बातचीत की।


दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि जी20 शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल होते तो अच्छा होता, लेकिन यह (सम्मेलन) ‘‘बेहतर ढंग से जारी है।’’ बाइडन जी20 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी भारत यात्रा पर अपने साथ आये अमेरिकी मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। यह पूछे जाने पर कि क्या शी जिनपिंग की गैर मौजूदगी का जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन पर असर पड़ा है, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘उनका यहां होना अच्छा होता लेकिन कोई बात नहीं, शिखर सम्मेलन बेहतर ढंग से जारी है।’’


उधर, जिनपिंग की अनुपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह हर देश को तय करना है कि ऐसे शिखर सम्मेलनों में उनका प्रतिनिधित्व किस स्तर पर होगा और किसी को भी इस संबंध में ज्यादा मतलब नहीं निकालना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि महत्वपूर्ण बात यह है कि उस देश ने क्या रुख अपनाया है, उस देश ने विचार-विमर्श और नतीजों में कितना योगदान दिया है।’’ जयशंकर ने कहा कि चीन ने जी20 शिखर सम्मेलन के विभिन्न नतीजों का समर्थन किया है।

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