By नीरज कुमार दुबे | Jan 05, 2023
उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे के दावे वाली 29 एकड़ जमीन पर जिन्होंने कब्जा किया हुआ है उनके मानवीय पहलुओं को तो मीडिया और सोशल मीडिया में जमकर उठाया जा रहा है लेकिन उसी उत्तराखंड के जोशीमठ में जिन लोगों के मकानों में दरार आ गयी है उनके बारे में कोई सहानुभूति नहीं जता रहा। जिन लोगों पर रेलवे की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है, उनके लिए सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण जैसे बड़े-बड़े वकीलों से लेकर ओवैसी जैसे तमाम नेता खड़े हो जा रहे हैं लेकिन जोशीमठ के लोगों के लिए सिर्फ उत्तराखंड की सरकार ही खड़ी हुई। हल्द्वानी में ही क्यों, मानवीय मुद्दा तो जोशीमठ में भी है जहां मेहनत से बनाये गये घर की दीवारों पर पड़ी बड़ी-बड़ी दरारें देखकर लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं और ठंड के इस मौसम में अपना सामान लेकर दूसरे स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्या किसी ने अब तक जोशीमठ के लोगों के प्रति जरा भी संवेदना जताई? कोई कैंडल मार्च निकाला? कोई सामूहिक प्रार्थना की?
वहीं जहां तक हल्द्वानी मामले की बात है तो आपको बता दें कि रेलवे के दावे वाली 29 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगते ही इलाके के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गयी। लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करने लगे। इससे पहले आज सुबह से ही इलाके में सामूहिक नमाज पढ़ी जा रही थी और दुआ मांगी जा रही थी कि अतिक्रमण हटाने के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लग जाये। हम आपको बता दें कि रेलवे के मुताबिक, उसकी भूमि पर 4,365 परिवारों ने अतिक्रमण किया है। रेलवे की भूमि पर 50,000 व्यक्ति निवास करते हैं, जिनमें से अधिकांश मुस्लिम हैं।