Chai Par Sameeksha: RSS और BJP में अब क्यों नहीं बन रही, क्या Modi से सचमुच नाराज हैं मोहन भागवत!

By अंकित सिंह | Jun 17, 2024

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह नवगठित मोदी सरकार पर कांग्रेस और इंडी गठबंधन की ओर से किये जा रहे हमलों और बीजेपी-आरएसएस संबंधसे जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अहंकारी और तानाशाह करार दिया जा रहा था। अब लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद संघ परिवार के नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री और भाजपा के बारे में ऐसा ही कुछ कहा जा रहा है। लेकिन जो कुछ कहा जा रहा है उसे हमला या आलोचना नहीं कहा जा सकता क्योंकि संघ ने हमेशा मार्गदर्शक के रूप में कार्य किया है इसलिए वह अब भी सही राह ही दिखा रहा है। 

नीरज दुबे ने बताया कि कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल ये दावा कर रहे हैं कि यह सरकार गिर जाएगी। अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि भले ही विपक्ष इस तरह के दावे कर रहा है लेकिन कहीं ना कहीं भाजपा की कोशिश सरकार को स्थिरता देने की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कोई भी दल इस तरीके का दावा करता रहता है ताकि उसके कार्यकर्ताओं का उत्साह बना रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार यह नहीं कहता कि वह हारने जा रहा है। ऐसे ही राजनीतिक दल भी यह कभी नहीं कहते कि जो सरकार सत्ता में है, वह अपना कार्यकाल पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि 2004 में जब एनडीए की हार हुई थी और कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी थी, तब भी इस तरह की बातें कहीं गई थी। लेकिन सरकार ने अपने कार्यकाल पूरे किए थे।

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नीरज दुबे ने विपक्ष से सवाल पूछते हुए यह भी कहा कि अगर नरेंद्र मोदी दो तिहाई के प्रधानमंत्री हैं फिर मनमोहन सिंह, चंद्रशेखर कितने तिहाई के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने कहा कि एनडीए चुनाव पूर्व गठबंधन था, उसी को जनादेश मिला है। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए हैं, एनडीए में शामिल कोई भी दल भागने की स्थिति में दिखाई नहीं दे रहा है। चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार एनडीए के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में इस सरकार को कहां खतरा है। मल्लिकार्जुन खड़गे को बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि खड़गे लगातार अल्पमत की सरकार का दावा कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें यह बताना चाहिए कि आखिर इस बार जनादेश किसको मिला था। नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के पास इंडिया गठबंधन में भी जाने का विकल्प मौजूद है। लेकिन वह नहीं जाएंगे क्योंकि उन्हें भी पता है कि वहां कई कंपीटीटर है जबकि यहां उन्हें सम्मान भी मिल रहा है और उनके राज्यों का भी ध्यान दिया जा रहा है।

बीजेपी और संघ के बीच रिश्तों पर नीरज कुमार दुबे ने कहा तनाव और खिंचाव जैसे शब्दों का इस्तेमाल न करें। लेकिन यह बात सही है कि भाजपा इस बार पूरे परिवार को साथ लेकर चलने में कामयाब नहीं रही। इस बार भाजपा नरेंद्र मोदी के चेहरे पर अति आत्मविश्वास में थी। भाजपा भी एकतरफा आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थी। ऐसे में कहीं ना कहीं जमीन पर जो रिपोर्ट मिली है उसी के आधार पर संघ ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संघ की ओर से भी लगातार यह कहा जा रहा था कि आत्मविश्वास में अपना काम बंद नहीं करना है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता जबरदस्त आत्मविश्वास में थे और शायद पार्टी अपने दम पर पूर्ण बहुमत में नहीं आई। बीजेपी के नेता भी यह मानकर चल रहे थे कि हम जो कह रहे हैं और कर रहे हैं, वही ठीक है। इसलिए अब संघ बार-बार बीजेपी को आईना दिखाने की कोशिश कर रहा है। संघ समय-समय पर सलाह देता रहा है। 

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