By अनन्या मिश्रा | Jun 02, 2026
शिव पुराण में 12 ज्योतिर्लिंग का उल्लेख मिलता है, जिनको द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव को समर्पित ज्योतिर्लिंग देश के अलग-अलग जगहों पर स्थापित हैं। ज्योतिर्लिंगों को भगवान शिव की शक्ति का केंद्र माना जाता है। वहीं 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ भी शामिल है। केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग का आध्यात्मिक महत्व बेहद अनोखा है। केदारनाथ मंदिर में शिवलिंग त्रिकोणीय आकार का है। यह एक विशाल चट्टान का हिस्सा है, जिसको स्वयंभू माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि केदारनाथ का शिवलिंग त्रिभुजाकार क्यों है।
जब महादेव भीम से बचने के लिए धरती में समाने लगे, तो भीम ने शिव को पकड़ने की कोशिश की। बैल का पूरा हिस्सा धरती में धस गया, लेकिन पीठ का हिस्सा वहीं रह गया, आज वही त्रिकोणीय शिवलिंग भगवान शिव के रूप में पूजा जाता है।
केदारनाथ मंदिर विशाल पठार के बीच में बना है। 8वीं शताब्दी में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ मंदिर का निर्माण कराया था। वहीं मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी बैल की एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, इस मंदिर का शिवलिंग त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है।
केदारनाथ में शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पर आते हैं। वहीं मंदिर में दर्शन करने से भक्तों के मन को शांति मिलती है। स्कंद पुराण के केदारखंड में केदारनाथ के त्रिभुजाकार शिवलिंग के बारे में वर्णन मिलता है। इस बार 22 अप्रैल से केदारनाथ मंदिर की यात्रा शुरू हो गई है। वहीं मंदिर के कपाट नवंबर तक खुले रहेंगे।
बता दें कि केदारनाथ के अलावा भगवान शिव के अंग अलग-अलग जगहों पर प्रकट हुए, जिनको आज पंचकेदार के नाम से जाना जाता है।
पंचकेदार
केदारनाथ
तुंगनाथ
रुद्रनाथ
मदमहेश्वर
कल्पेश्वर