क्या ज्यादा बदलाव करके खुद के जाल में फंस गई टीम इंडिया?

By दीपक कुमार मिश्रा | Mar 16, 2019

विदेशों में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम इंडिया का बुरा समय स्वदेश में आया। पिछले लंबे समय से विदेश में नीली जर्सी में तहलका मचाने वाली विराट सेना अपने घर में कंगारूओं के सामने ढेर हो गई। भारत को पहले टी-20 सीरीज में 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद जब बारी वनडे की आई तो पहले दो मैच जीतने के बाद सीरीज हार जाना टीम के ऊपर कई सवाल खड़े करता है। वर्ष 2017 के शुरूआत में एमएस धोनी का विराट कोहली को कप्तान सौंपना कई क्रिकेट विशेषज्ञों को रास नहीं आया। कई जगह धोनी के विश्व कप नहीं खेलने की अटकलें भी लगाई जानी लगीं। लेकिन भारत को 2011 में एकदिवसीय विश्व कप जिताने महेंद्र सिंह धोनी चाहते थे कि 2019 विश्व कप से पहले विराट कोहली टीम की अगुवाई करें और अनुभव हासिल करें। साल 2017 में कोहली की कप्तानी में भारत इंग्लैंड में हुए चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचा। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम इंडिया फाइनल में हार गई। उस वक्त लगा कि अभी तो विराट कोहली की कप्तानी की शुरूआत है। आने वाले वक्त में वो कप्तानी के गुर सीख जाएंगे जिससे भारत को फायदा होगा। इसके बाद भारत ने ज्यादातर विदेशी दौरे किए। दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में जाकर भारत ने इतिहास रचा। लेकिन इस दौरान भारत इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप के लिए संयोजन तलाशने में जरूरत से अधिक बदलाव करने लगा। आलम ये था कि लगभग हर मैच में टीम कुछ अलग दिखाई देती थी। विश्व कप से पहले टीम मैनेजमेंट अपनी बेंच स्ट्रैंथ आजमाना चाहती थी। भारत चाहता था कि मध्य क्रम के बल्लेबाजों को ज्यादा मौके मिलें और टीम इंडिया वर्ल्ड कप में अपनी पूरी ताकत से मैदान में उतरे। लेकिन ये बदलाव का फॉर्मूला टीम इंडिया पर भारी पड़ गया और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत वर्ल्ड कप से पहले एकदिवसीय श्रृंखला शर्मनाक रूप से गंवा बैठा। 

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अभी भी अनसुलझी पहेली है नंबर 4 का क्रम !

न्यूजीलैंड में शानदार प्रदर्शन करने वाले अंबाति रायडू को देखकर लगा कि वो वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लिए नंबर 4 पर बल्लेबाजी करेंगे। कीवी टीम के खिलाफ पांचवें वनडे में 90 रन की पारी से भारतीय टीम मैनेजमेंट के चेहरे पर सुकून के पल आने अभी शुरू ही हुए थे कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के तीन वनडे में रायडू का फेल होना फिर से नंबर 4 के बल्लेबाज पर सवाल खड़ा कर गया। अंबाति रायडू ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले तीन वनडे में 13, 18 और 2 रन का स्कोर बनाया। जिसके बाद टीम मैनेजमेंट को उन्हें बाकी बचे दो वनडे मैच से बाहर कर दिया। रायडू की जगह विजय शंकर को नंबर चार पर मौके दिए गए। लेकिन वो भी एक बल्लेबाज के रूप में अपने आपको साबित करने में फेल हुए। नंबर 4 टीम इंडिया के लिए एक ऐसी पहली बना हुआ है। जहां कभी विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी ने भी बल्लेबाजी की। वहीं युवा बल्लेबाज ऋषभ पंत को भी नंबर 4 का कार्यभार संभालने के लिए भेजा गया। लेकिन वो भी वहां फेल ही साबित हुए। साफ है वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया अपने सारे एकदिवसीय मैच खेल चुकी है। अब इंग्लैंड में टीम इंडिया को नंबर चार पर मजबूत बल्लेबाज चाहिए तो चयनकर्ताओं को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

क्या अभी भी दमदार है कुलदीप-चहल की जोड़ी ?

कंगारूओं के खिलाफ सीरीज से पहले युजवेंद्र चहल अपने जोड़ीदार कुलदीप यादव के साथ अच्छी गेंदबाजी कर रहे थे। लेकिन पिछले कुछ समय से इस जोड़ी में ज्यादा बदलाव किए जा रहे हैं। कभी कुलदीप के साथ रवींद्र जड़ेजा को आजमाया जाता है, तो कभी चहल को अकेले ही मैच में गेंदबाजी का भार सौंप दिया जाता है। दक्षिण अफ्रीका दौरे पर अपने कलाई के दम पर टीम इंडिया को सीरीज जिताने वाले चहल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने घर में फ्लॉप रहे। बेंगलुरू में कंगारूओं के खिलाफ दूसरे टी-20 में 4 ओवर में चहल ने 47 रन लुटाए। वहीं मोहाली में चहल काफी मंहगे साबित हुए और अपने 10 ओवर के कोटे में 80 रन दे बैठे। जाहिर है चहल के अंदर अब आत्मविश्वास में कमी दिखाई देती है। इसका कारण ज्यादातर बाहर बैठना भी हो सकता है। चहल के ऊपर टीम मैनेजमेंट को भरोसा जताना होगा क्योंकि अगर भारत को इंग्लैंड में विश्व कप जीतना है तो कुलदीप-चहल की जोड़ी का चलना काफी जरूरी है।

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क्या पंत को मिलना चाहिए इंग्लैंड का टिकट ?

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज से पहले ऋषभ पंत को इंग्लैंड भेजे जाने के पक्ष में ज्यादातर पूर्व क्रिकेटर अपनी राय जता चुके थे। पंत को टीम में एमएस धोनी के बाद विकेटकीपर का विकल्प माना जाने लगा था। वहीं टीम मैनेजमेंट उन्हें कभी नंबर चार तो कभी फिनिशर के रूप में देखती थी। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में मौका मिलने पर पंत ने सभी को निराश किया। मोहाली वनडे में तेजतर्रार 36 रन बनाने वाले पंत ने विकेटकीपिंग में निराश किया। वहीं दिल्ली में तो पंत बल्ले से भी दम नहीं दिखा सके। इस युवा बल्लेबाज को भी पिछले कुछ समय से कई बैटिंग पोजिशन पर मौका दिया गया लेकिन वहा उन्होंने निराश ही किया। टेस्ट मैचों में शानदार खेल दिखाने वाले पंत के नीली जर्सी में प्रदर्शन को लेकर चयनकर्ताओं को विचार करने की जरूरत है। हालांकि पंत अभी भी विश्व कप टीम में अपनी जगह बना सकते हैं। क्योंकि पंत के तेजी से रन बनाना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। जिसको देखते हुए भारत पंत को इंग्लैंड वर्ल्ड कप की टीम में ले जा सकता है। 

-दीपक कुमार मिश्रा

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