मोदी-बाइडेन की मुलाकात, जापान और ऑस्ट्रेलियाई पीएम से द्विपक्षीय संवाद, 'मिनी नाटो' की बैठक से क्यों घबराया चीन?

By अभिनय आकाश | May 20, 2022

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते क्वाड शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए जापान जाएंंगे। यहां क्वाड के मंच से अलग अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से उनकी द्विपक्षीय बैठक होनी है। जो बाइडेन आज ही कोरिया और जापान के दौरे पर निकल चुके हैं। बतौर राष्ट्रपति बाइडेन पहली बार किसी एशियाई देश के दौरे पर हैं। बाइडेन की इस यात्रा का लक्ष्य दोनों देशों के नेताओं के साथ संबधों को मजबूत करना है। बाइडेन जापान में क्वाड शिखर सम्मेलन में कई नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। 

बता दें कि दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात सितंबर 2021 व्हाइट हाउस में हुई थी। तब पीएम मोदी क्वाड देशों की समिट में हिस्सा लेने वाशिंगटन पहुंचे थे और अब दोनों नेता 24 मई को जापान में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। पीएम मोदी 24 मई को ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों का फोकस 11 अप्रैल 2022 को हुई वर्चुअल मीटिंग की चर्चा को आगे बढ़ाने पर होगा। दोनों के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक डेवलपमेंट पर साझा हितों पर बातचीत हो सकती है। 24 मई 2022 का दिन भारत-अमेरिका के साथ पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम रहने वाला है।  पीएम मोदी की जापान और ऑस्ट्रेलिया के पीएम के साथ भी द्विपक्षीय मुलाकात होनी है। 

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सदस्य देशों के आपसी संबंधों की मजबूती पर फोकस

जापान की ओर से क्वाड देशों की बैठक के एजेंडे को लेकर कोई भी खुलासा नहीं किया गया है। क्वाड देशों की इस बैठक का मकसद सदस्य देशों के आपसी संबंधों को मजबूत करना है। इस यात्रा का मकसद चीन को संदेश देना भी है कि यूक्रेन पर रूसी हमले के मद्देनजर चीन को प्रशांत क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को विराम देना चाहिए। चीन हमेशा से इन चार देशों के गठजोड़ को अपने खिलाफ मानता है। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जैक सुलेवन ने कहा है कि इस यात्रा के जरिये हम जो संदेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं वो ये है कि दुनिया के सभी लोकतांत्रकि देश एक साथ खड़े होकर दुनिया के नियमों को आकार दे सकते हैं। 

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शिजों आबे ने दी क्वाड की अवधारणा

क्वाड की अवधारणा 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दी थी और तब भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया की नौसैनाओं ने साझा युद्धाभ्यास भी किया था। लेकिन उसके बाद इस दिशा में कुछ ठोस नहीं किया जा सका।  एलएसी पर तनाव के बीच भारत की तरफ से फिर से इसे मजबूत बनाने का प्रयास किया गया। क्वाड एक ऐसा मंच है जिसके जरिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र की चारों प्रमुख आर्थिक शक्तियों ने चीन को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि क्षेत्र में उसके दबदबे की मंशा को स्वीकार नहीं किया जाएगा और उसे कोई भी कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत उठाना होगा।

 चीन क्यों चिंतित?

बीजिंग ने इसे मिनी नाटो बताते हुए कहा था कि भारत, अमेरिका समेत चारों देश क्वाड को चीन के खिलाफ मजबूत गठबंधन के तौर पर तैयार करने में जुटे हैं। हाल ही में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा था कि क्वाड ग्रुप अप्रचलित शीत युद्ध और सैन्य टकराव की आशंकाओं में डूबा हुआ है। यह समय की प्रवृत्ति के विपरीत चलता है और इसका खारिज होना तय है।

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