मोदी सरकार के 'मिस्टर डिपेंडेबल', आखिर क्यों धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे? वजह समझिए!

By अभिनय आकाश | Jul 24, 2026

26 दिनों का सोनम वांगचुक का ऐतिहासिक अनशन जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों का सड़क पर गूंजता विरोध और संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष का तीखा हमला। पूरे देश में सिर्फ एक ही मांग गूंज रही थी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। लेकिन इतना भारी जन आक्रोश इतनी राजनीतिक दबाव और नीट यूजी 2026 पेपर लीक का इतना बड़ा घोटाला होने के बावजूद मोदी सरकार ने अपनी मंत्री का इस्तीफा आखिर क्यों नहीं लिया? क्या यह सरकार की कोई बहुत बड़ी मजबूरी है? या फिर इसके पीछे छिपा हुआ है पीएम मोदी का वो सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक जिसे समझ पाना आसान बिल्कुल नहीं होगा। आपको बता दें धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के एक बेहद प्रभावशाली राष्ट्रीय नेता हैं जो मूल रूप से उड़ीसा के तालचर के रहने वाले हैं। वर्तमान में वो देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और लोकसभा में ओसा की संभलपुर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। अब चलिए आपको बताते हैं कि राजनीतिक विश्लेषक ने क्या वजह बताई है जिससे यह साबित होता है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा शायद ना दें। सबसे पहली और सबसे बड़ी वजह है गलती स्वीकार करने का डर। अगर सरकार धर्मेंद्र प्रधान से आज इस्तीफा ले लेती है तो विपक्ष और जनता के बीच सीधा यह संदेश जाएगा कि सरकार ने नीट पेपर लीक में अपनी पूरी गलती और नाकामी को स्वीकार कर लिया है। मोदी सरकार कभी भी बैकफुट पर दिखाने वाली छवि नहीं बनाना चाहती। इसीलिए इस्तीफे की जगह सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों पर सख्त कारवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट के दांव खेलकर मुद्दे को घुमाने की रणनीति अपनाई है।

प्रकाश जावडेकर- 2 साल, 329 दिन

रमेश पोखरियाल- 2 साल, 38 दिन

धर्मेंद्र प्रधान- 5 साल, 16 दिन (7 जुलाई, 2021 से 21 जुलाई 2026 तक)

विरोध प्रदर्शन के दबाव का कोई असर नहीं

सबसे दिलचस्प वजह है द मोदी वे ऑफ पॉलिटिक्स यानी पीएम मोदी की काम करने की खास कार्यशैली। दरअसल केंद्र सरकार ने सभी बड़े फैसलों का केंद्र हमेशा एक्टिव मोड में रहा है। अगर आज किसी एक मंत्री की बलि दी जाती है तो विपक्ष इसे सीधे प्रधानमंत्री और पूरी सरकार की नाकामी के रूप में पेश करेगा। इसके अलावा पीएम मोदी की 10 सालों की राजनीति को देखें तो वह कभी भी विरोध प्रदर्शन या किसी के दबाव में आकर फैसले नहीं लेते हैं। वे सार्वजनिक रूप से यह संदेश बिल्कुल नहीं देना चाहते हैं कि सरकार किसी के आगे झुक गई है। मजबूत नेतृत्व की यह छवि बनाए रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है। तीसरी वजह है भविष्य का खतरा। अगर सरकार इस बार दबाव में आकर इस्तीफा स्वीकार कर लेती है तो यह विपक्ष के लिए एक बहुत बड़ा हथियार बन जाएगा। आने वाले दिनों में हर छोटे बड़े विवाद पर विपक्ष मंत्रियों के इस्तीफा की मांग को लेकर अड़ जाएगा। और याद कीजिए 2015 का वो दौर जब तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुलेआम कहा था कि एनडीए सरकार में केवल आरोपों के आधार पर मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। बीजेपी ने पिछली सरकारों से सीख ली है। जहां आरोपें लगते थे कि तुरंत इस्तीफा हो जाते थे। मोदी सरकार इस परंपरा को पूरी तरह बदल चुकी है। हालांकि ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने कभी फैसले नहीं बदले। 2018 में एमजे अकबर का इस्तीफा और 2021 में तीनों कृषि कानूनों की वापसी इसके बड़े उदाहरण हैं। लेकिन इस बार परिस्थितियां बिल्कुल अलग है। सरकार अब पूर्ण बहुमत में नहीं बल्कि एनडीए के सहयोगियों के साथ सत्ता में है। इसीलिए हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है। 

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12 सालों की अटूट पारी और भारतीय शिक्षा में बदलाव के सूत्रधार

केंद्रीय राजनीति में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका बेहद सशक्त और निरंतर रही है। पिछले 12 वर्षों से बिना किसी ब्रेक के लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहते हुए उन्होंने एक लंबा और सफल सफर तय किया है। भारतीय राजनीति के इतिहास में आजादी के बाद सबसे लंबे समय तक पेट्रोलियम मंत्री रहने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है। इसके अलावा, वे कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा इस्पात मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी कुशलतापूर्वक संभाल चुके हैं। शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020' को धरातल पर उतारने के लिए गति प्रदान की। उनका मुख्य ध्यान बच्चों की शुरुआती पढ़ाई में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देने पर रहा है। प्राथमिक शिक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक प्रमुख वैचारिक स्तंभ माना जाता है। धर्मेंद्र प्रधान ने खुद इस बात को सहर्ष स्वीकार किया है कि NEP 2020 के कई अहम पहलू—जैसे कि कौशल विकास, शिक्षकों का प्रशिक्षण और मातृभाषा आधारित शिक्षण—संघ से जुड़े शैक्षिक संगठन 'विद्या भारती' के अनुभवों और कार्यों से प्रेरित हैं।

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