जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ बनाया जाएगा कानून? सुप्रीम कोर्ट ने की अहम टिप्पणी, क्या हैं इसके मायने

By अभिनय आकाश | Dec 06, 2022

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर जबरन धर्म परिवर्तन को गंभीर मद्य करार देते हुए कहा कि इसे संविधान के खिलाफ बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चैरिटी कार्यों का स्वागत है, लेकिन उन्हें धर्म परिवर्तन के मकसद से नहीं किया जाना चाहिए। लाइव लॉ के अनुसार कोर्ट ने रुपये, खाने या दवाई का लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाने वालों को गलत बताते हुए कहा, जो गरीब और जरूरतमंद की मदद करना चाहता है, जरूर करे, लेकिन इसका मकसद धर्म परिवर्तन करवाना नहीं होना चाहिए। बेंच ने कहा, 'इसे विरोध के तौर पर मत लीजिए। यह गंभीर मुद्दा है। यह हमारे संविधान के खिलाफ है। जब कोई व्यक्ति 'भारत में रहता है तो उस हर व्यक्ति को भारत की संस्कृति के अनुसार चलना होगा। इस मामले में अगली सुनवाई 12 दिसंबर को करेगा।

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यहां तक कि संविधान भी एक नागरिक द्वारा धर्म के गलत प्रचार की अनुमति नहीं देता है। मेहता ने यह भी कहा कि केंद्र धर्म परिवर्तन पर राज्यों से आंकड़े जुटा रहा है। उन्होंने न्यायाधीशों से कहा कि कई राज्यों ने समितियों के गठन के लिए कानून बनाए हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि क्या धर्मांतरण "अनाज, दवाओं के बदले में किया गया था या क्या यह वास्तविक धार्मिक हृदय परिवर्तन है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को यह भी बताया कि गुजरात ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ एक कड़ा कानून पेश किया था लेकिन उच्च न्यायालय ने इसके कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है।

गुजरात उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त, 2021 को गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम की कई धाराओं पर रोक लगा दी थी। यह कानून पिछले साल अप्रैल में "उभरती हुई प्रवृत्ति जिसमें महिलाओं को शादी के लिए लुभाया जाता है" को रोकने के लिए पारित किया गया था।

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